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Thursday, August 29, 2024

सभी नुक्कड़ों को जोड़ने वाली रेल दिलों को भी जोड़ती है

इसी लिए कहते हैं रेल ही है संसार की लाईफ लाईन 

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चंडीगढ़: 29 अगस्त 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//रेल स्क्रीन डेस्क)::

रेल के बिना तो यह संसार चल ही नहीं सकता। यातायात से लेकर सामान की ढो-ढुलाई तक ज़िन्दगी के बहुत से ज़रूरी काम रेल के ज़रिए ही सिरे चढ़ते हैं। भारत में रेल परिवहन जीवन रेखा की तरह है,एक लाईफ लाईन। इसी तरह दुनिया भर में भी है। हर जगह और हर किसी को जोड़ने वाली ट्रेनों पर बहुत से गीत भी लिखे जा चुके हैं। इसके बिना ज़िन्दगी की कल्पना भी कैसे संभ हो सकती है। इसके अलावा कई अन्य देशों में भी रेल परिवहन का महत्व बहुत अधिक है। कुछ ऐसे देश जहां रेल जीवन रेखा की तरह मानी जाती है। 

सबसे अधिक विकसित गिना जाने वाला देश जापान भी इस रेल के महत्व को समझता है। जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन दुनिया की सबसे तेज़ और विश्वसनीय रेल सेवाओं में से एक है। यहां रेल परिवहन का प्रमुख साधन है, खासकर बड़े शहरों में।

दुनिया का बेहद शक्तिशाली देश रूस भी रेल का लोहा मानता है। ट्रांस-साइबेरियन रेलवे रूस को पूर्व से पश्चिम तक जोड़ने वाला सबसे लंबा रेल मार्ग है। यहां रेल परिवहन का देश की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान है।

दुनिया के शक्ति केन्दों को प्रभावित करने वाला विशाल देश चीन भी इस रेल  तरफ  है। चीन में तेजी से विकसित होती हाई-स्पीड रेल नेटवर्क ने रेल को प्रमुख परिवहन साधन बना दिया है। यह देश के विशाल क्षेत्र को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यूरोप के देश भी रेल  प्रभावित हैं। जर्मनी, फ्रांस, और स्विट्ज़रलैंड में रेल परिवहन का बहुत महत्व है। इसके बिना जनजीवन सोचा भी नहीं जा सकता। यूरोप में इंटरसिटी और अंतरराष्ट्रीय रेल सेवाएं अत्यधिक विकसित हैं, जो लोगों को शहरों और देशों के बीच सुगम यात्रा की सुविधा प्रदान करती हैं।

विकास के मामले में दशकों तक बाकी दुनिया से एडवांस समझा जाता अमेरिका भी रेल की तरफ निरंतर ध्यान देता है। अमेरिका के पूर्वी तट और कुछ अन्य क्षेत्रों में रेल परिवहन महत्वपूर्ण है, विशेषकर न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और बोस्टन जैसे शहरों में।

इन देशों में रेल परिवहन न केवल यात्रियों के लिए बल्कि माल ढुलाई के लिए भी महत्वपूर्ण है, और यह वहां की जीवनशैली और अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है। दुनिया के सभी देशों और कोनों को एक दुसरे से जोड़ने वाली रेल दिलों को भी जोड़ती है। 

Thursday, January 2, 2020

भारतीय रेलवे ने एकीकृत हेल्‍पलाइन नम्‍बर ‘139’ की घोषणा की

Thursday: 02 JAN 2020 5:41PM by PIB Delhi
किसी भी तरह की मदद, पूछताछ और शिकायत के लिए विशेष सुविधा
नई दिल्ली: 2 जनवरी 2020: (रेल मंत्रालय//पीआईबी//रेल स्क्रीन)::
रेल से सफर के दौरान पूछताछ एवं शिकायत निवारण के लिए कई हेल्‍पलाइन नम्‍बर रहने के कारण यात्रियों को हो रही असुविधा को समाप्‍त करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक अभिनव पहल की है। भारतीय रेलवे ने इसके तहत समस्‍त हेल्‍पलाइन नम्‍बरों को एकीकृत कर केवल एक हेल्‍पलाइन नम्‍बर ‘139’ में तब्‍दील कर दिया है, ताकि सफर के दौरान यात्रियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों का त्‍वरित निवारण संभव हो सके। सभी मौजूदा हेल्‍पलाइन नम्‍बरों (182 को छोड़कर) के स्‍थान पर अब केवल एक ही नया हेल्‍पलाइन नम्‍बर ‘139’ रहने से यात्रियों के लिए इस नम्‍बर को याद रखना और सफर के दौरान अपनी सभी जरूरतों की पूर्ति के लिए रेलवे से संपर्क साधना या कनेक्‍ट करना काफी आसान हो जाएगा।

निम्‍नलिखित रेल शिकायत निवारण हेल्‍पलाइन नम्‍बरों को अब समाप्‍त किया जा रहा है :
इस तरह काम करेगा यह विशेष नंबर:
138 (सामान्‍य शिकायतों के लिए)
1072 (हादसों एवं सुरक्षा के लिए)
9717630982 (एसएमएस संबंधी शिकायतों के लिए)
58888 / 138 (अपने कोच को स्‍वच्‍छ रखने के लिए)
152210 (सतर्कता के लिए)
1800111321 (केटरिंग सेवाओं के लिए)
हेल्‍पलाइन नम्‍बर ‘139’ बारह भाषाओं में उपलब्‍ध रहेगा। यह आईवीआरएस (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्‍पॉन्‍स सिस्‍टम) पर आधारित है। हेल्‍पलाइन नम्‍बर ‘139’ पर कॉल करने के लिए किसी स्‍मार्ट फोन की जरूरत नहीं है। अत: ऐसे में सभी मोबाइल यूजर के लिए इस नम्‍बर तक आसान पहुंच रहेगी।

‘139’ हेल्‍पलाइन (आईवीआरएस) से संबंधित विवरण कुछ इस प्रकार से है :

सुरक्षा एवं चिकित्‍सा सहायता के लिए यात्री को ‘1’ नम्‍बर को दबाना होगा, जो कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारी से उसे तत्‍काल कनेक्‍ट कर देगा।
पूछताछ के लिए यात्री को ‘2’ नम्‍बर को दबाना होगा। इसके अंतर्गत ही पीएनआर स्‍टैटस, ट्रेन के आगमन/प्रस्‍थान, एकोमोडेशन, किराया संबंधी पूछताछ, टिकट बुकिंग, प्रणाली के तहत टिकट निरस्‍त करने, वेकअप अलार्म सुविधा/प्रस्‍थान संबंधी अलर्ट, व्‍हील चेयर की बुकिंग और भोजन की बुकिंग के बारे में भी आवश्‍यक जानकारियां प्राप्‍त की जा सकती हैं।  
केटरिंग संबंधी शिकायतों के लिए यात्री को ‘3’ नम्‍बर को दबाना होगा।
सामान्‍य शिकायतों के लिए यात्री को ‘4’ नम्‍बर को दबाना होगा।
सतर्कता संबंधी शिकायतों के लिए यात्री को ‘5’ नम्‍बर को दबाना होगा।
हादसे के दौरान पूछताछ करने के लिए यात्री को ‘6’ नम्‍बर को दबाना होगा।
शिकायतों की ताजा स्थिति से अवगत होने के लिए यात्री को ‘9’ नम्‍बर को दबाना होगा।
कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारी से बात करने के लिए यात्री को ‘*’ को दबाना होगा।
***

Wednesday, January 1, 2020

भारतीय रेलवे ने यात्री किराये को तर्कसंगत बनाया

Wednesday:01st  January 2020 at 1:36 PM by PIB Delhi
आधुनिकीकरण और अत्याधुनिक सुविधाओं को बढ़ावा देने का उपाय
नई दिल्ली: 1 जनवरी 2020: (रेल मंत्रालय//पीआईबी//रेल स्क्रीन)::

भारतीय रेलवे आधुनिकीकरण और रेलगाड़ियों और स्टेशनों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के प्रावधान के माध्यम से यात्रियों के अनुभव को अच्‍छा बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। रेलवे ने अंतिम किराया संशोधन 2014-15 में किया था।  रेलवे स्टेशनों और रेलगाडि़यों में यात्री सुविधाओं का विस्तार करने के लिए किसी भी श्रेणी के यात्रियों पर भार डाले बिना किराये में मामूली बढ़ोतरी करना बहुत जरूरी हो गया है। इसके अलावा, भारतीय रेलवे पर 7वें वेतन आयोग का बोझ भी बढ़ा है। इस कारण किरायों को तर्कसंगत बनाना आवश्‍यक हो गया है। किराया संशोधन से भारतीय रेलवे के तेजी से होने वाले आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।

      तदनुसार, रेलवे ने किराए में मामूली वृद्धि करने का निर्णय लिया है। दैनिक यात्रियों की सामर्थ्यता को देखते हुए उपशहरी वर्ग यात्रियों और सीज़न टिकट धारकों के किराए में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। इस वर्ग का भारतीय रेलवे के यात्री खंड में 66% हिस्सा है। यहां तक ​​कि साधारण गैर एसी श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों के किराए में 1 पैसा/यात्री किलोमीटर की मामूली वृद्धि होगी। किराए में वृद्धि 1 जनवरी, 2020 को या उसके बाद खरीदे गए टिकटों में होगी। 1 जनवरी 2020 से पहले बुक किए टिकटों के लिए यात्रियों से कोई अतिरिक्त किराया (किराए का अंतर) नहीं लिया जाएगा। किराया संशोधन इस प्रकार है:
साधारण गैर-एसी श्रेणियां (गैर-उपनगरीय): किराए में 01 पैसा/यात्री किलोमीटर की वृद्धि
मेल/एक्‍सप्रेस गैर-एसी श्रेणियां : किराए में 02 पैसा/यात्री किलोमीटर की वृद्धि
एसी श्रेणियां - किराए में 04 पैसा/यात्री किलोमीटर की वृद्धि
उपनगरीय किराया और सीजन टिकट: कोई वृद्धि नहीं
      राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, तेजस, हमसफर, महामना, गतिमान, अंत्योदय, गरीब रथ, जन शताब्दी, राज्य रानी, ​​युवा एक्सप्रेस, सुविधा और विशेष प्रभारों पर विशेष रेलगाडि़यों,  एसी मेमू (गैर-उपनगरीय) एसी डेमू (गैर-उपनगरीय) आदि रेल सेवाओं के मौजूदा किरायों में उपरोक्त प्रस्तावित वृद्धि की सीमा तक ही संशोधन किया जाएगा।
      आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट अधिभार आदि के प्रभारों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस तरह के प्रभार जहां लागू हैं वे अतिरिक्त रूप से लगाए जाएंगे। समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार जीएसटी लगाया जाएगा।
      भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए सुविधाओं के उन्नयन, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण तथा रेलगाडि़यों में और रेलगाडि़यों से बाहर अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के अतिरिक्‍त प्रयास कर रही है। यात्री किराए को तर्कसंगत बनाने से इस दिशा में भारतीय रेलवे के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।

Thursday, May 19, 2016

भारतीय रेल नेटवर्क का नई दिल्ली-चंडीगढ़ गलियारा


18-मई-2016 19:11 IST
एसएनसीएफ द्वारा संभावना/कार्यान्वयन अध्ययन जारी 
रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने 2014-15 के अपने रेल बजट भाषण में घोषणा की थी कि दिल्ली-चंडीगढ़ गलियारे को सवारी गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाकर 160/200 किलोमीटर प्रति घंटा करने के लिए उन्नत बनाया जाएगा। रेल मंत्रालय ने फ्रेंच नेशनल रेलवे (एसएनसीएफ) के साथ रेल के विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग के लिए 14/02/2013 को करार पर हस्ताक्षर किया। सहमति ज्ञापन में दिए गए सहयोग के क्षेत्रों में एक क्षेत्र भारतीय रेल की वर्तमान अवसंरचना पर ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए अनुभवों तथा टेक्नोलॉजी और तौर-तरीकों का आदान-प्रदान करना है। सहयोग के विषयों तथा विशेष परियोजनाओं पर बातचीत के लिए सीआरबी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय शिष्टमंडल मई, 2014 में एसएनसीएफ (फ्रांस) गया था। विचार-विमर्श के दौरान दिल्ली-चंडीगढ़ गलियारे पर रफ्तार बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बाद में अप्रैल, 2015 में माननीय प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा के दौरान रेल मंत्रालय की स्वीकृति के साथ दिल्ली-चंडीगढ़ सेक्शन पर सेमी हाईस्पीड रेल में सहयोग पर एसएनसीएफ के साथ प्रोटोकॉल हुआ। दिसंबर, 2015 में रेल मंत्रालय और एसएनसीएफ के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया और इसके माध्यम से 50:50 प्रतिशत लागत वहन आधार पर सवारी गाड़ियों की गति 200 किलोमीटर प्रति घंटे करने की संभावना और क्रियान्वयन पर अध्ययन करने का काम एसएनसीएफ को सौंपा गया। इस अध्ययन की कुल लागत 19,69,02,721 रुपये (कर के बिना) है और इसके पूरा होने की कुल अवधि एक साल है। अध्ययन का कार्य 19 जनवरी, 2016 को शुरू हुआ। अध्ययन को तीन चरणों में बांटा गया है और प्रत्येक चरणों में कवर किए जाने वाले क्षेत्रों का ब्यौरा निम्नलिखित हैं। 

चरण-1 (प्रारंभ होने की तिथि से चार महीने में)- फिल्ड विजिट, सर्वे, संभावित तकनीकी सॉल्युशनों की समीक्षा तथा उन्नयन के तीन उच्च स्तरीय मानक विकसित करना। 

चरण-2 (चरण-1 के पूरा होने की तिथि से दो महीने में)- संचालन, आर्थिक प्रभाव/इसमें स्थितियों का मूल्यांकन, परिवहन तथा संचालन योजनाओं पर प्रभाव, भारतीय रेल के लिए आर्थिक/वित्तीय प्रभाव और भारतीय रेल के साथ प्राथमिकता वाले परिदृश्य का चयन। 

चरण-3 (चरण-2 की समाप्ति के बाद छह महीने में)- क्रियान्वयन योजना तथा टेंडरों का क्रियान्वयन। इसमें संदर्भ डिजाइन, मात्राओं के बिल, चुनिंदा आधार पर भारतीय रेल द्वारा व्यापक एचएसएस उन्नयन कार्यक्रम के लिए सिफारिश शामिल है। 

अभी पहले चरण का काम चल रहा है। पहले चरण के चार महीनों को चार भागों यानी एक-एक महीने की अवधि में बांटा गया है और प्रत्येक महीने एसएनसीएफ तथा उत्तर रेल के संबद्ध अधिकारियों की बैठक होती है। इसे परियोजना समीक्षा का नाम दिया गया है। आज यानी 18 मई, 2016 को हुई बैठक में तीसरी परियोजना की समीक्षा की गई। (PIB)
***

Tuesday, February 17, 2015

लुधियाना रेलवे स्टेशन पर हंगामा--NRMU का ज़ोरदार प्रोटेस्ट

करीब 3 घंटे तक रुकी चंडीगढ़ जाने वाली ट्रेन-यात्री बेहाल और गाड़ी खाली 
लुधियाना: 17 फ़रवरी 2015:(रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
चंडीगढ़ राज्य की राजधानी होने के कारण तकरीबन सभी कार्यों का सरकारी केंद्र भी है। चंडीगढ़ जाये बिना शायद किसी भी नागरिक का गुज़ारा नहीं। चंडीगढ़  बहुत देर से एक ही रास्ता था सड़क का रास्ता। वहां उस अत्यंत व्यस्त रुट पर चलती हैं कुछ ख़ास लोगों की बसें। सुना है कुछ सियासी और कारोबारी घरानों ने अपने मुनाफे को बनाये लिए इस रुट परबार बार घोषणा और वायदों के बावजूद रेल लाईन नहीं बिछने दी।  आखिरकार 2011 में साहनेवाल के रास्ते चंडीगढ़ जाने वाली लाईन बिछी तो आम लोग बहुत खुश हुए लेकिन ऊँठ का होंठ नहीं गिरा। लाईन बिछी, घोषणाएं जारी रहीं लेकिन गाड़ी नहीं चली। जब देश में आई मोदी सरकार तो  कहीं जा कर शुरू हुयी चंडीगढ़ जाने वाली रेल ट्रैक पर रेल गाड़ी। फायदा हुआ अमृतसर, लुधियाना, जालंधर के साथ साथ फिरोज़पुर और फाजिल्का तक के इलाकों में  लोगों को भी। जल्द ही इस फायदे को नज़र लगने लगी। इसका अहसास एक बार फिर हुआ लुधियाना रेलवे स्टेशन पर उस समय जब फिरोज़पुर से आई और चंडीगढ़ को जाने वाली रेल गाड़ी को। इसे रोकने का तरीका और बहन इतना पेचीदा की ट्रेन रुकने पर भी किसी को समझ नहीं आया कि इसे किस ने और क्यों रोका ?
आम जनता से भी हुयी बहस
ड्राईवर गाड़ी के डीज़ल इंजन में थे। कागज़ पत्रों पर डयुटी के आवश्यक हस्ताक्षर तक हो चुके थे। गाड़ी को लेजाने वाली पावर भी ट्रैक पर थी और गाड़ी  जोड़ा जा चुका था लेकिन रेल प्रशासन ने अचानक फरमान जारी किया कि इसे लुधियाना के  डवीयन के ड्राईवर लेकर जाएंगे वरना गाड़ी यहीं रुकेगी।
यह आदेश नियमों को ताक पर रख कर दिया गया था और फिरोज़पुर डवीयन के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात भी। यह एक डवीयन के कार्यक्षेत्र में दूसरी डवीयन का अनाधिकृत हस्तक्षेप भी बनता था। इसके विरोध में खुल कर सामने आई NRMU और सभी यूनियन के सभी सदस्य लुधियाना रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-8 पर पहुँच गए। रेल मुलाज़िमों के इस खाड़कू संगठन ने स्पष्ट कहा कि हम अपना अधिकार नहीं छोड़ेंगे। इस टकराव  NRMU ने अपने ड्राईवरों को ट्रेन में बिठाये रखा और रेल प्रशासन से बार बार कि गाड़ी को जाने दो और हमसे बैठ कर नियमों की बात करो। बार बार कहने के बावजूद रेल प्रशासन अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। जब एक घंटे के बाद गाड़ी खाली हो गई तो रेल प्रशासन के लोगों में से किसी   कहा--अब गाड़ी तो खाली हो गयी।  अब गाड़ी भरो। इस पर मुलाज़िमों और दैनिक यात्रियों ने फिर नारेबाजी की। गुस्से में आए डेली पैसंजरों ने एक और गाड़ी के सामने धरना दिया।
मीडिया से भी उलझन
इस रोष को देख कर गुस्से में आये सुरक्षा बलों ने उनको भी अपना हाथ दिखाया और खदेड़ दिया।  मीडिया  भी सुरक्षा  नोक झौंक चलती रही। बी तीन घंटे के बाद डीटीएम ने अपनी गलती मानी और रेल मुलाज़िमों से समझौता कर लिया। रेल मुलाज़िमों के सक्रिय नेता कामरेड दलजीत सिंह ने कहा कि अगर इसी गलती को पहले मान कर सहमति कर ली जाती तो बहुत से मुसाफिरों का समय बच जाता।
उन्होंने कहा कि अब हमारी यूनियन मुसाफिरों की भलाई के लिए उनके साथ मिलकर एक तालमेल कमेटी भी बनाएगी। इसी बीच सुरक्षा बलों के एक अधिकारी ने यात्रिओं से की गयी सख्ती पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि हमारी हालत तो दांतों में जीभ जैसी है।  अगर हम गाड़ी के इंजन पर चढ़े लोगों को नहीं खदेड़ते तो उन्हें ऊपर से गुज़र रही तार से करेंट का डर और अगर अगर अब उतरा है तो हम पर ही सख्ती  लग रहे हैं। दूसरी तरफ मीडिया का कहना था कि हिम्मत है तो यूनियन पर हाथ डालो रोज़ी रोटी  में परदेसी हुए डेली पैसेंजरों पर गुस्सा क्यों?
अब सोचने वाली बात यह है कि जो मुसाफिर निराश और हताश हो कर रेल गाड़ी को छोड़ कर बसों की तरफ चले गए उनका रेल से उठता विश्वास कौन बहाल करेगा? इससे जो घाटा रेल को पड़ा उसकी भरपाई करेगा? रेल  विभाग में कुछ असरदायिक लोगों के बस मालिकों से मिले होने के आरोपों की जाँच कौन करवाएगा? इस   तरह बहुत से सवाल हैं जो अपना जवाब चाहते हैं। इस मौके पर कामरेड परमजीत सिंह, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह,राज कुमार सूद, महिंदरपाल, वरिंदर वीरू, सुखजिंदर सिंह और गौरव इत्यादि बहुत  सदस्य भी मौजूद थे।  तकरीबन तीन घंटे तक चले इस ड्रामे के बाद NRMU की एक विशेष मीटिंग यूनियन  जगराओं पल  कार्यालय में हुयी जिसमें सारे मामले पर विचार विमर्श करने  अगली रणनीति तय की गयी।

 सरकार ने कसा ट्रेड यूनियनों पर शिकंजा--नहीं कर सकेंगे हड़ताल


Tuesday, October 8, 2013

रेल संबंधी संसदीय स्‍थायी समि‍ति‍ ने किये सुझाव आमंत्रि‍त

08-अक्टूबर-2013 16:35 IST
मुद्दा: उपनगरीय रेल सेवाएं और उनमें महि‍ला यात्रि‍यों की सुरक्षा
30 दिनों भीतर देने होंगें सुझाव/ज्ञापन देने 
नई दिल्ली: 8 अक्टूबर 2013: (पीआईबी): श्री टी.आर.बालू, संसद सदस्‍य की अध्‍यक्षता वाली वि‍भागों से संबद्ध रेल संबंधी स्‍थायी समि‍ति‍ ‘वि‍शेरू रूप से महि‍ला यात्रि‍यों की सुरक्षा पर बल देते हुए भारतीय रेल की उपनगरीय रेल सेवाएं’ वि‍षय की जांच इस संबंध में संसद में प्रति‍वेदन प्रस्‍तुत करने के लि‍ए कर रही है। उप नगरीय रेल सेवा भारतीय रेल द्वारा उपलबध कराई गई महत्‍वपूर्ण सेवा है। इस वि‍षय में प्रदान की गई उपनगरीय सेवाओं की प्रकृति‍, इन सेवाओं में और सुधार की गुंजाइश, उपनगरीय रेल गाड़ि‍यों में दैनि‍क यात्रि‍यों के समक्ष आ रही समस्‍याओं और वि‍शेष रूप से महि‍ला यात्रि‍यों पर बल देते हुए यात्री सुरक्षा से संबंधि‍त मुद्दे शामि‍ल हैं। वि‍षय की महत्‍ता को देखते हुए समि‍ति‍ ने इस वि‍षय तथा इससे संबंधि‍त मामलों पर इच्‍छुक व्‍यक्‍ति‍यों/एसोसि‍एशनों/वि‍शेषज्ञों/व्‍यवसायि‍क संगठनों/संस्‍थाओं आदि‍ से वि‍चार/सुझाव/टि‍प्‍पणि‍यां देते हुए लि‍खि‍त ज्ञापन आमंत्रि‍त करने का नि‍र्णय लि‍या है। 

समि‍ति‍ को ज्ञापन भेजने के इच्‍छुक व्‍यक्‍ति‍ इस वि‍ज्ञापन के प्रकाशन की ति‍थि‍ से 30 दि‍नों के भीतर दो प्रति‍यां (अंग्रेजी या हि‍न्‍दी में) नि‍देशक (पीएसी एंड आर), लोक सभा सचि‍वालय, कमरा संख्‍या-439 संसदीय सौध, नई दि‍ल्‍ली-110001 (दूरभाष संख्‍या 011-23034439, 23034089; फैक्‍स संख्‍या 011-23019956; ई मेल: comrail@sansad.nic.in ) को भेज सकते हैं। 

समि‍ति‍ को प्रस्‍तुत ज्ञापन समि‍ति‍ के रि‍कार्ड का भाग होंगे और इन्‍हें पूर्णत: ‘गोपनीय’ माना जाएगा तथा इन्‍हें कि‍सी को भी परि‍चालि‍त नहीं कि‍या जाएगा, ऐसा करना इस समि‍ति‍ के वि‍शेषाधि‍कार का हनन होगा। 

ज्ञापन भेजने के अति‍रि‍क्‍त, समि‍ति‍ के समक्ष मौखि‍क साक्ष्‍य देने के इच्‍छुक व्‍यक्‍ति‍यों से अनुरोध है कि‍ वे समि‍ति‍ के वि‍चारार्थ लोक सभा सचि‍वालय को इसकी सूचना दें। समि‍ति‍ के समक्ष उपस्‍थि‍त होने के लि‍ए व्‍यक्‍ति‍यों को आमंत्रि‍त करने के संबंध में समि‍ति‍ का नि‍र्णय अंति‍म होगा। 

भारतीय संसद, लोक सभा सचि‍वालय द्वारा जारी। 

वि.कासोटिया/राजगोपाल/मनीषा-6530

Wednesday, March 27, 2013

सुपर फास्‍ट गाड़ियों की आरक्षण फीस तथा पूरक शुल्‍क

बढ़ी हुई आरक्षण फीस की वापसी पहली अप्रैल 2013 से लागू
रेल बजट 2013-14 में सुपर फास्‍ट गाड़ियों की आरक्षण फीस, पूरक शुल्‍क के संशोधन और बढ़ी हुई आरक्षण फीस की वापसी के बारे में घोषणा की गई है। संशोधित दरें पहली अप्रैल 2013 को और उसके बाद जारी टिकटों पर लागू होगी। आरक्षण की इन दरों का ब्‍यौरा निम्‍नलिखित है:-
आरक्षण फीस
श्रेणी
संशोधित फीस (रुपये में)

वर्तमान
संशोधित
द्वितीय  
15
15 (कोई परिवर्तन नहीं)
स्‍लीपर
20
20 (कोई परिवर्तन नहीं)
वातानुकूलित चेयर कार
25
40
वातानुकूलित -3 इकॉनिमी
25
40
वातानुकूलित -3 टीयर
25
40
प्रथम श्रेणी
25
50
वातानुकूलित -2 टीयर
25
50
वातानुकूलित प्रथम
35
60
एक्‍जीक्‍यूटिव
35
60
(i) सुपरफास्‍ट गाडि़यों के लिए पूरक शुल्‍क 
श्रेणी
सुपरफास्‍ट गाडि़यों के लिए पूरक शुल्‍क    (रुपये में)

वर्तमान
संशोधित
द्वितीय  
10
15
स्‍लीपर
20
30
वातानुकूलित चेयर कार
30
45
वातानुकूलित -3 इकॉनिमी
30
45
वातानुकूलित -3 टीयर
30
45
प्रथम श्रेणी
30
45
वातानुकूलित -2 टीयर
30
45
वातानुकूलित प्रथम
50
75
एक्‍जीक्‍यूटिव
50
75
   
***
 मीणा/क्‍वात्रा/लक्ष्‍मी-1609

संशोधित तत्‍काल शुल्‍क

रेल यात्रा के लिए संशोधित तत्‍काल शुल्‍क पहली अप्रैल 2013 से लागू
रेल बजट 2013-14 में की गई घोषणा के अनुसार रेल मंत्रालय ने तत्‍काल शुल्‍क को संशोधित करने का निर्णय लिया है। यात्रा के लिए संशोधित शुल्‍क 1 अप्रैल, 2013 से लागू होंगे। अब तत्‍काल शुल्‍क आरक्षित द्वितीय श्रेणी (2एस) के बुनियादी किराये के 10 प्रतिशत और अन्‍य सभी श्रेणियों के लिए बुनियादी किराये के 30 प्रतिशत तक के अनुसार लिए जायेगे। इसमें न्‍यूनतम और अधिकतम शुल्‍क   निम्‍न तालिका में दिखाये गए है:-  
यात्रा की श्रेणी
निम्‍नतम तत्‍काल शुल्‍क (रूपये में)
अधिकतम तत्‍काल शुल्‍क (रूपये में)
आरक्षित द्वितीय सीट(2एस) 
10
15
शयनयान
90
175
वातानुकूलित चेयर कार
100
200
वातानुकूलित-3 टियर
250
350
वातानुकूलित-2 टियर 
300
400
एक्‍जीक्‍यूटिव
300
400

मीणा/विजयलक्ष्मी/सुमन–1610

Tuesday, February 26, 2013

रेल मंत्रालय दक्ष बनाएगा युवाओं को

देश भर में 25 स्‍थानों पर रेल संबंधी ट्रेडों में युवाओं को कुशल बनाने का प्रस्‍ताव
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने आज संसद में 2013-14 का रेल बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार के राष्‍ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम में अपना योगदान देने के लिए रेल मंत्रालय देशभर में 25 स्‍थानों पर रेल संबंधी ट्रेडों में युवाओं को दक्ष बनाएगा। ये स्‍थान हैं: अगरतला, अलवर, अंकलेश्‍वर, चंडीगढ़, देहरादून, दीमापुर, इम्‍फाल, जगदलपुर, जैस, कटिहार, काजीपेट, कोल्‍लम, कोरापुट, लमडिंग, मंगलौर, मुर्शिदाबाद, नागपुर, नजरलागुन, पठानकोट, रांची, रतलाम, शिमला, सिरसा, श्रीनगर और तिरूच्चिरापल्‍ली।   (PIB) 

वि.कसोटिया/अलकेश/अंबुज/प्रदीप/प्रियंका/लक्ष्‍मी/तारा/सुनील/सोनिका/राजू-30 एडीएचओ-

Wednesday, January 30, 2013

वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों का विकास

30-जनवरी-2013 12:58 IST
1975 में की गई थी भारत में डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत
विशेष लेख                                                                    रेल एच सी कुंवर* 
   भारत में डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत 1975 में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्‍य कम दूरी की यात्री गाडियों में ज्‍यादा यात्रियों को ढोना था। भारतीय रेल के इस प्राथमिक लक्ष्‍य को तो प्राप्‍त कर लिया गया लेकिन ये गैर वातानुकूलित ट्रेन यात्रियों के बीच बहुत अधिक पसंद नहीं की गई। इसका प्रमुख कारण निचले स्‍तर से धुएं का प्रवेश और प्‍लेटफार्म स्‍तर की ऊँचाई पर बाहर के दृश्‍यों का न दिख पाना था। इस कारण भारतीय रेल में गैर वातानुकूलित ट्रेनों के विकास को और अधिक अनुकरित नहीं किया गया।
   अपने लंबे अनुभवों के साथ भारतीय रेल ने फिर एक बार डबल डेकर ट्रेनों को प्रारंभ् करने की योजना बनाई जिसमें गैर वातानुकूलित डब्‍बों में आ रही समस्‍याओं को वातानुकूलित रूप में दूर किया जा सके। रेल मंत्री ने वर्ष 2009 के रेल बजट में वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत की घोषणा की।
   मौजूदा स्‍थाई ढांचों जैसे रोड ओवर ब्रिज, फुट ओवर ब्रिज और बिजली की लाइनों आदि को ध्‍यान में रखते हुए बिना ऊँचाई बढाये डबल डेकर ट्रेनों का विकास करना एक बडी चुनौती थी। इसके साथ ही वातानुकूलित उपकरणों और एयर डक्‍ट को भी उपलब्‍ध जगह में ही समाने की समस्‍या थी।
   इन चुनौतियों को ध्‍यान में रखते हुए भारतीय रेल के डिजाईन इंजीनियरों ने प्रत्‍येक कोच में और ज्‍यादा कोच और पूर्णता घरेलू स्‍तर पर ही इसके विकास की प्रक्रिया शुरू करी। उनकी कार्यकुशलता तब साबित हुई जब भारतीय रेल की एक उत्‍पादन ईकाई रेल कोच फैक्‍ट्री कपूरथला ने सिर्फ 9 महीने के रिकार्ड समय में पहला प्रोटो टाईप वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन को तैयार कर लिया। सभी आवश्‍यक परीक्षणों को पूर्ण करने के बाद अक्‍तूबर 2011 में हावडा और धनबाद के बीच पहली वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन की शुरूआत की गई।
   इस ट्रेन के एक उन्‍नत संस्‍करण का विकास कर जयपुर और दिल्‍ली तथा अहमदाबाद और मुम्‍बई के बीच इसकी सेवाएं प्रारंभ की गई। निकट भविष्‍य में हबीब गंज-इंदौर और चैन्‍नई-बंगलौर के बीच भी ऐसी सेवा प्रारंभ करने की योजना है। यात्रियों के अनुकूल डिजाईन के साथ वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन प्रत्‍येक कोच में 120 यात्रियों को ले जा सकती है जो शताब्‍दी चेयर कार के 78 यात्रियों से तुलना करने पर 50 फीसदी अधिक है। अपने कम किराये के कारण वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों ने वातानुकूलित सफर का आनंद कई इच्‍छुक यात्रियों को दिलाने में सफल रही हैं और इस कारण यात्रियों के बीच बेहद पसंद की जा रही है।
   इन नई वातानुकूलित डिब्‍बों में कई तकनीकी खूबियां जैसे हल्‍के वज़न वाली स्‍टेनलेस स्‍टील बॉडी और आंखों को मोहने वाली भीतरी साज सज्‍जा हैं। एयर स्प्रिंग के साथ यूरो फिल्‍मा डिजाईन के डिब्‍बे से यात्रियों को सफर में बेहतर आराम मिलता है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के ऊपर न चढने वाले  और दुर्घटना की स्थिति में इसको वहन करने वाले डिब्‍बे भी प्रदान किये गये हैं। इन डिजाईन के कारण प्रति या‍त्री ट्रेन पर कम भार पडता है जिससे वो उच्‍च ऊर्जा क्षमता वाले बन गये हैं।
   दो डिब्‍बों के बीच की दीवारों के स्‍थान का अधिकतम इस्‍तेमाल कर दोनों स्‍तरों के लिए स्‍थान का प्रबंध किया गया है। जिससे डिब्‍बों की कुल ऊँचाई सिर्फ 4.5 इंच बढी है। इन डिब्‍बों के विकास प्रक्रिया के दौरान नवीनतम डिजाईन सॉफ्टवेयरों का प्रयोग किया गया और वा‍स्‍तविक उत्‍पादन शुरू करने से पहले प्रोटो टाइपिंग कर इसकी जांच की गई।
वातानुकूलित डबल डेकर डिब्‍बों के सफल विकास से भारतीय रेल ने तकनीकी विकास में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इससे रेलवे ने तीव्र गति से बढ रहे देश की आशाओं को परिपूर्ण करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।(PIB)      (पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)
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* उप-निदेशक (मीडिया एवं दूरसंचार), रेल मंत्रालय
मीणा/जुयाल/चन्‍द्रकला  – 30
एचडीएचओ –

Thursday, January 24, 2013

अनुमानित राजस्‍व 89906.46 करोड़ रुपये रहा

23-जनवरी-2013 14:50 IST
भारतीय रेलवे ने 2012 में हासिल किये नये मुकाम 
    प्रारंभिक आधार पर 01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 के दौरान भारतीय रेलवे का कुल अनुमानित राजस्‍व 89906.46 करोड़ रुपये रहा, जबकि यह राशि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 75009.17 करोड़ रुपये था और इस प्रकार इसमें 19.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। माल ढुलाई से प्राप्‍त होने वाली आय 01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2011 दौरान 49868.95 करोड़ रुपये रहा, जो  01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 के अवधि के दौरान बढ़कर 62413.41 करोड़ रुपये हो गया और इस प्रकार इसमें 25.15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यात्रि से प्राप्‍त होने वाली आय एक अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 अवधि के दौरान पिछले वर्ष के इसी अवधि के दौरान प्राप्‍त आय 20999.01 करोड़ रुपये से बढ़कर 23025.34 करोड़ रुपये हो गया और इस प्रकार इसमें 9.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कैलेंडर वर्ष 2012 के दौरान नवम्‍बर, 2012 तक भारतीय रेलवे ने कुल 3903.84 करोड़ रुपये की स्‍क्रैप की बिक्री की है, जबकि पिछले वर्ष के इसी अवधि के दौरान कुल बिक्री 3748.68 करोड़ रुपये की हुई है।
    अनुमानित कुल यात्रियों की बुकिंग 01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 के अवधि के दौरान पिछले वर्ष के इसी अवधि के 6210.12 मिलियन की तुलना में 6422.29 मिलियन रहा। इस प्रकार इसमें 3.42 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई। भारतीय रेलवे ने अप्रैल से दिसम्‍बर, 2012 के अवधि के दौरान 735.10 मिलियन टन की माल ढुलाई की है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 703.77 मिलियन टन रही और इस प्रकार इसमें 31.33 मिलियन टन माल ढुलाई की वृद्धि हुई, जिससे 4.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
    रेल मंत्रालय द्वारा उठाये गए ठोस कदम के तहत फरवरी, 2012 में विशेष प्रयोजन माध्‍यम (एस पी वी) भारतीय रेलवे स्‍टेशन विकास निगम लिमिटेड (आईआरएसडीएल) की स्‍थापना एक समझौते के तहत की गई। इसका उद्देश्‍य देश में रेलवे स्‍टशनों के पुनर्विकास कार्य के साथ-साथ स्‍टेशनों का रख-रखाव करना है। इस नये एसपीवी के तहत चिन्हित स्‍टेशनों पर पर्याप्‍त स्‍थानयुक्‍त प्रतीक्षालय, पलेटफॉर्मों पर आसानी से पहुंचना तथा इसे भीड़-भाड़ से मुक्‍त बनाने के साथ-साथ उच्‍च स्‍तरीय खान-पान सुविधाओं सहित होटल और अन्‍य सुविधाओं का प्रस्‍ताव करना है। प्रारंभिक अध्‍ययन और क्षेत्रीय रेलवे के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद पांच स्‍टेशन -बिजवासन (दिल्‍ली), हबीबगंज (भोपाल), आनन्‍द विहार (दिल्‍ली), चंडीगढ़, शिवाजी नगर (पुणे) का चयन किया गया है, जहां कार्यान्‍वयन पहले चरण में आईआरएसडी के जरिए किया जाएगा।
     एक महत्‍वपूर्ण पहल के तहत वास्‍तविक और वैध यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने और आरक्षित  टिकट प्रणाली के दुरुपयोग में बिचौलियों तथा अवांछित तत्‍वों की भूमिका खत्‍म करने के लिए रेल मंत्रालय ने सभी आरक्षित टिकट श्रेणियों में या‍त्रा के दौरान पहचान पत्र का मूल प्रमाण पत्र रखना अब अनिवार्य कर दिया गया है। मूल पहचान प्रमाण पत्र के बिना यात्रा करने वाले लोगों को बे-टिकट समझा जाएगा और यात्रा के दौरान उचित प्रभार वसूला जाएगा। नीति में बदलाव लाने का उद्देश्‍य वास्‍तविक और वैध यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाना और हस्तांतरित टिकटों पर यात्रा करने वालों की जांच करना है। इस नीति के प्रावधान को सुरक्षा व्‍यवस्‍था के लिए भी उपयोगी समझा जा रहा है।
    वर्ष 2012 के दौरान रेलवे के ढांचागत परियोजनाओं पर विशेष ध्‍यान दिया गया। नवम्‍बर, 2012 के अंतिम सप्‍ताह के दौरान प्रधानमंत्री के अध्‍यक्षता में संरचना पर हुई बैठक में समीक्षा के बाद महत्‍वपूर्ण संरचना परियोजनाएं जैसे- मुम्‍बई में एलिवेटेड रेल कॉरीडोर, सार्वजनिक - निजी भागीदारी के आधार पर लोकोमोटिव फैक्‍टरी, रेल टैरिफ प्राधिकरण तथा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर की स्‍थापना के लिए तय सीमा निर्धारित की गई है। इन मुद्दों पर रेलवे मंत्रालय द्वारा समयबद्ध कार्या योजना तैयार की गई है। मुम्‍बई विश्‍व में सबसे अधिक भीड़-भाड़ और दबाव वाले उपनगरीय प्रणालियों में से एक है। कॉरीडोर पर क्षमता दबाव को देखते हुए रेल मंत्रालय ने क्षमता प्रणाली का और विस्‍तार करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत चर्चगेट-वीरा सेक्‍शन के साथ एलिवेटेड कॉरीडोर को दो मार्ग का बनाना है। यह नया एलिवेटेड रेल कॉरीडोर (ईआरसी) ओवल मैदान और पश्चिमी रेलवे के विरार क्षेत्र में होगा। 63.27 किलोमीटर लंबे ईआरसी परियोजना पर लगभग 21,000 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है। इस कॉरीडोर के तहत 26 स्‍टेशन बनाए जाएंगे, जिसमें पांच भूमिगत, 19 एलिवेटेड और दो ग्रेड पर स्थित होंगे।
    महत्‍वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण उधमपुर - बारामुला- श्रीनगर रेल लिंक परियोजना के बनिहाल-काजीगुंड खंड को पूरा कर भारतीय रेलवे ने परिवहन क्षेत्र में भी एक लंबी छलांग लगाई है। इस खंड पर ट्रायल शुरू कर दिया गया है, इस खंड पर सभी प्रमुख कार्य पूरे कर लिये गए हैं और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह खंड जल्‍द ही शुरू कर दिया जाएगा और 17.729 किलोमीटर लंबी इस खंड पर 11.215 किलोमीटर लंबाई की सुरंग है, जिसे पीर पंजाल सुरंग कहा जाता है। यह सुरंग भारत में सबसे लं‍बी और एशिया की दूसरी सबसे लंबी परिवहन सुरंग है।
    इस वर्ष भारतीय रेलवे की महत्‍वाकांक्षी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (डीएफसी) के कार्यान्‍वयन पर जोर दिया गया। मुम्‍बई में जवाहर लाल नेहरू पत्‍तन (जीएनपीटी) से नई दिल्‍ली के नजदीक दादरी/ तुगलकाबाद के बीच 1499 किलोमीटर लंबी पश्चिमी डीएफसी और पंजाब में लुधियाना से से कोलकाता के डानकुनी के बीच 1839 किलोमीटर लंबी पूर्वी डीएफसी नामक दोनों कॉरीडोर में काफी प्रगति आई है। भूमि अधिग्रहण में भी प्रगति देखी जा रही है और नवम्‍बर, 2012 तक कुल 10703 हेक्‍टेयर भूमि में से दोनों कॉरीडोर  के लिए 7768 हेक्‍टेयर भूमि अर्थात 73 प्रतिशत का अधिग्रहण किया जा चुका है। जेआईसीए के जरिए पश्चिमी डीएफसी के लिए प्रारंभिक वित्‍तीयन समझौता और विश्‍व बैंक के जरिए पूर्वी डीएफसी (लुधियान-खुरजा-कानपुर-मुगलसराय) के खंड के लिए वित्‍तीयन समझौते को अंतिम रूप दिया गया है, जबकि पूर्वी डीएफसी के डानकुनी - सोननगर खंड के लिए पीपीपी के जरिए कार्यान्‍वयन का प्रस्‍ताव किया गया है तथा पूर्वी डीएफसी के मुगलसराय- सोननगर खंड का क्रियान्‍वयन रेल मंत्रालय के संसाधन द्वारा किया जा रहा है।
    स्‍वच्‍छ भारत अभियान पर पर्यटन मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच एक समझौता किया गया, जिसके तहत दोनों मंत्रालय मिलकर रेल यात्रियों के लिए सतत जागरुक अभियान की ओर कार्य करेंगे। साथ ही पर्यटन मंत्रालय के सेवा प्रदाता क्षमता निर्माण योजना के तहत सेवा प्रदान करने के लिए कार्य करेंगे तथा संबंधित हितधारकों से विचार-विमर्श और परामर्श कर स्‍टेशनों और कोचों की साफ-सफाई और उनके रखरखाव के लिए रणनीति तैयार करेंगे। इस बीच, रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है, जिसमें रेलवे परिसर में स्‍वच्‍छता और साफ-सफाई को प्रभावित करने वाले गतिविधियों को रोकने संबं‍धी नियम के साथ-साथ इन नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान है, लेकिन जो कोई भी दिये गए नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्‍लंघन नहीं करता है तो नियमों के तहत पांच सौ रुपये का जुर्माना किया जाएगा। 
           देश में डिजायन किए गए विकसित और विनिर्मित वातानुकूलित डबल डेकर रेलगाडियों को पहली बार हावड़ा और धनबाद के बीच चलाया गया। इस वर्ष इस रेलगाडी के डिजायन में और भी सुधार कर इसे विकसित किया गया है और जयपुर और दिल्ली तथा अहमदाबाद और मुंबई के बीच पेश किया गया है। निकट भविष्य में हबीबगंज-इंदौर और चेन्नई-बंगलौर के बीच इस तरह की सेवाओं की योजना तैयार की गई है। वातानुकूलित डबल डेकर रेलगाडी में प्रति कोच 120 यात्रियों की क्षमता है और यात्रियों के बीच यह लोकप्रिय हो रहा है।
     रेलवे बोर्ड के निरंतर प्रयासों और मंडलीय रेलवे के ऊर्जा संरक्षण प्रयासों से वर्ष 2012 के दौरान 773 आवेदनों के कुल 87 पुरस्कारों में से भारतीय रेलवे को सर्वाधिक 11 राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुए। 14 दिसंबर 2012 को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा यह प्रदान किया गया।
     भारतीय रेलवे ने सुरक्षा में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास किया है। रेलवे सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली (टीपीडब्ल्यूएस) को उत्तर/उत्तर मध्य रेलवे के हजरत निजामुद्दीन-आगरा मार्ग (200 किलोमीटर मार्ग) पर पायलट आधार पर विस्तृत किया गया है जहां कार्य प्रगति पर है। एसीडी और टीपीडब्ल्यूएस प्रणाली से प्राप्त अनुभव के आधार पर भारतीय रेलवे ने रेलगाडी टक्कर परिहार प्रणाली (टीसीएएस) के विकास का बीडा उठाया है। यह टीपीडब्ल्यूएस और एसीडी का मिश्रण होगा और खतरनाक स्थिति में सिग्नल देने और टक्कर को रोकने में कारगर होगा। अभिरुचि का हित आमंत्रित करने के बाद छह भारतीय फर्मों को चुना गया है। इनमें से एक फर्म ने प्रोटोटाइप का विकास किया है जिसका ट्रायल दक्षिण मध्य रेलवे में अक्तूबर 2012 को किया गया।
     रेलवे उपयोगकर्ताओं को और भी सहूलियत देने के लिए भारतीय रेलवे ने भारतीय रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) के जरिए मोबाइल फोन के द्वारा ई-टिकट आरक्षित करने की सुविधा मुहैया करा रहा है। शुरुआती पंजीकण और उपयुक्त सॉफ्टवेयर को मोबाइल पर डाउनलोड करके इंटरनेट सुविधा के साथ मोबाइल द्वारा टिकट आरक्षित करना काफी आसान है। बुकिंग के बाद यात्री को आरक्षण का संदेश टिकट के पूरे ब्यौरे जिसमें पीएनआर, रेलगाडी संख्या, यात्रा की तिथि और वर्ग आदि शामिल है, के साथ मिल जाता है। मुद्रित ई-टिकट से बेहतर समझा जाता है।
     अपने यात्रियों और कर्मचारियों को स्वच्छ माहौल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के सथ ही भारतीय रेलवे ने अपने पैंसेजर कोचों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के साथ मिलकर पर्यावरण अनुकूल जैव-शौचालयों को विकसित किया है। इन जैव-शौचालयों में मानव मल बैक्टिरिया द्वारा उपचारित होता है जो कि मनुष्यों के लिए हितकर है। यह बैक्टिरिया मानव मल को पानी और गैस (मीथेन और कार्बन-डाइऑक्साइड) में बदल देता है। गैस वातावरण में मिल जाते हैं दूषित जल का क्लोरिनेशन कर दिया जाता है। इससे मानव मल परटरियों पर नहीं फैलता। आठ रेलगाडियों में वर्ष 2012-13 के दैरान 436 जैव-शैचालयों को स्थापित किया गया है, इसके अलावा 2500 और जैव-शौचालयों को प्रस्तुत का जाएगा। 2016-17 तक नए कोचों को पूरी तरह से जैव-शौचालयों से युक्त कर दिया जाएगा और तेरहवीं पंचवर्षीय योजना यानि 2021-22 के दौरान डायरेक्ट डिस्चार्ज यात्रि कोच शौचालय प्रणाली को समाप्त करने का लक्ष्य है।
     इज्जत योजना के तहत यात्रा दूरी को 100 किलोमीटर से बढ़ाकर 150 किलोमीटर तक कर दिया गया है। अन्य नियम और शर्तों में कोई बदलाव नहीं है।  इज्जत मासिक टिकट खरीद (एमएसटी) पर यह मान्य है  जो कि एक जून 2012 को अथवा इसके बाद लिया गया हो। यह योजना असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन लोगों के लिए है जिनकी मासिक आय 1500/-रुपए से अधिक नहीं है।
     रेलगाडियों और स्टेशनों दोनों पर केटरिंग सेवाओं के निरीक्षण और निगरानी  को मजबूत बनाया गया है जिसकी वजह से शिकायतों की संख्या में  कैलेंडर वर्ष (अक्तूबर 2012 तक) के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.82 प्रतिशत (लगभग) की कमी हुई है। जनवरी से अक्तूबर 2012 के दौरान लगभग 26860 बार मंडलीय रेलवे द्वारा केटरिंग की गुणवत्ता की जांच की गई। केटरिंग सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए  भारतीय रेलवे की केटरिंग सेवाओं के लिए टेंडर प्रदान करने के लिए मानक निविदा दस्तावेज (एसबीडी) तैयार किया गया है।
     लोगों को रेलगाडी के चलने की सही जानकारी के लिए भारतीय रेलवे ने सूचना सुविधा के दायरे को बढ़ाया है। अब सभी रेलगाडियों के लिए www.trainenqiry.com पर उनके चलने की जानकारी उपलब्ध है। इसी प्रकार यह सेवा 139 पर एसएमएस द्वारा भी उपलब्ध है। इससे पहले केवल 36 महत्वपूर्ण रेलगाडियों (शताब्दी, राजधानी और दुरंतों) के चलने की जानकारी ही   www.simran.in  पर तथा 9415139139 पर एसएमएस द्वारा उपलब्ध थी।
     भारतीय रेलवे अधिक सुरक्षित, तीव्र, स्वच्छ और आरादमदायक यात्रि रेलगाडियों के लिए व्यापक रणनीति अपना रहा है। इसके लिए पहले उच्च गति की रेलगाडियों के लिए सात गलियारों की पहचान की गई है। यह गलियारें पीपीपी के जरिए स्थापित किए जाएंगे। शुरु में, मुंबई-अहमदाबाद गलियारे को लिया गया है जिसका पूर्व-व्यवहारिक अध्य्यन पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई मार्ग पर भी जापान के साथ अध्य्यन किया जा रहा है ताकि पैसेंजर रेलगाडियों की गति को 160 किलोमीटर प्रति घंटा से बढाकर 200 किलोमीटर प्रति घंटा किया जा सके। तीसरे भारतीय रेलवे अक्वारिंग इलेक्ट्रिकल मल्टिपल युनिट (ईएमयू) की अवधारणा पर भी काम कर रहा है। इससे तीव्र और सुरक्षित यात्रा  में मदद मिलेगी।
     भारतीय रेलवे और राज्य सरकार के साझेदारी मॉडल को जारी रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य में रेल गलियारों के विकास के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यात्रियों और माल के लिए तीन रेल गलियारों का विकास छत्तीसगढ राज्य के उत्तरी क्षेत्र में किया जाएगा। यह लगभग कुल 453 किलोमीटर लंबाई का होगा। ये गलियारे इस प्रकार हैं- 1. पूर्वी गलियारा- भूपदेवपुर-घरघोदा-धर्मजयगढ़ कोबरा तक  लगभग 180 किलोमीटर लंबाई 2. उत्तरी गलियारा- सुरजापुर-पार्सा-कटघोरा-कोबरा , लगभग 150 किलोमीटर लंबाई और 3. पूर्वी-पश्चिमी गलियारा- गेवरा रोड से पेंड्रा रोड तक लगभग 122 किलोमीटर लंबाई। यह परियोजनाएं विशिष्ट स्पेशल पर्पज व्हेकल (एसपीवी) द्वारा लागू की जाएगी।
     रिक्तियों को भरना प्राथमिकता है और रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा इसे सक्रियता से किया जा रहा है। वर्ष 2012 में 271 वर्गों के लिए 14 लिखित परिक्षाएं हुई जो कि 50515 रिक्तियों के लिए थीं। पिछले 11 महीनों यानि एक जनवरी 2012 से 30 नवंबर 2012 की अवधि के दौरान मंडलीय रेलवे/ प्रोडक्शन युनिटों को सुरक्षा वर्ग के पदों के लिए खासतौर पर 15,838 उम्मीदवारों का पैनल दिया गया है। 2012 में 138 वर्गों के लिए 27,038 रिक्तियों के लिए पांच केन्द्रीकृत अधिसूचनाएं जारी की गई। इनमें से 26,213 रिक्तियों के लिए इस वर्ष चार अधिसूचनाओं के लिए परीक्षाएं कराई जा चुकी हैं।
     लंदन ओलंपिक 2012 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रेलवे मंत्रालय ने रेलवे के खिलाडियों का सम्मान किया। उन्हें एक शॉल, स्मृति पत्र और पुरस्कार राशि का चैक प्रदान किया गया। सुशील कुमार जिन्होंने लंदन ओलंपिक में कुश्ती (66 भारवर्ग फ्री स्टाइल) में रजत पदक जीता उन्हें 75 लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया। निशानेबाजी (50 मीटर प्रोन) के अंतिम दौर में चौथा स्थान हासिल करने वाले जॉयदीप कर्माकर और गोला फेंक में 7वां सथान पाने वाली श्रीमती कृष्णा पूनिया को 25 लाख का नकद पुरस्कार दिया गया। देश में खेलों को बढावा देने के लिए रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड को वर्ष 2012 के लिए “राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार” दिया गया जो कि युवा मामलों और खेल मंत्रालय द्वारा घोषित राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का भाग है।

     अन्य देशों के साथ रेलवे क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग एक अग्रसर प्रक्रिया है। भारत और चीन ने अन्य के साथ, रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग पर सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों देश उच्च गति रेल, भारी वहन शुल्क और स्टेशन विकास सहित रेलवे प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देंगे। भारतीय रेलवे और बेल्जियम के बीच भी दोनों देशों के बीच रेलवे क्षेत्र के प्रभावी विकास और आधुनिकीकरण के लिए द्विपक्षीय सहयोग पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा भारत सरकार और स्पेन सरकार के बीच रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। स्विट्जरलैंड और जर्मनी के साथ भी अलग अलग रुप से रेलवे क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर वार्ता की गई। (PIB)

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मीणा/विजयलक्ष्‍मी/आनन्‍द/शौकत-27