Friday, March 6, 2026

मोबाइल से निकालो प्लेटफॉर्म टिकट,भीड़ से पाओ राहत

 रेल मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 06 MAR 2026 at 5:32PM by PIB Jaipur 

 वैद्यता पूर्ववत दो घंटे//रेलवे का यात्री सुविधा हेतु डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा 


जयपुर
: 06 मार्च 2026:(PIB Jaipur//रेल स्क्रीन डेस्क)::

रेलवे यात्रियों को बेहतर और त्वरित सुविधाएं देने के लिए लगातार डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दे रहा है। इसी क्रम में अब यात्री अपने मोबाइल फोन के माध्यम से ही प्लेटफॉर्म टिकट प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए रेलवे द्वारा शुरू किए गए रेलवन एप का उपयोग किया जा सकता है। इस सुविधा के शुरू होने से स्टेशन पर टिकट खिड़की के सामने लगने वाली लंबी कतारों से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।

जोधपुर मंडल के सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार यात्रियों को अब प्लेटफॉर्म टिकट लेने के लिए काउंटर तक जाने की आवश्यकता नहीं है। वे अपने मोबाइल में रेलवन एप डाउनलोड कर आसानी से प्लेटफॉर्म टिकट बुक कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि एप से टिकट बुकिंग की प्रक्रिया सरल है और कुछ ही मिनटों में टिकट जारी हो जाता है। टिकट जारी होने के बाद उसका डिजिटल स्वरूप मोबाइल में उपलब्ध रहता है,जिसे स्टेशन पर जांच के समय दिखाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म टिकट की यह व्यवस्था यात्रियों के समय की बचत के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन में भी सहायक होगी। त्योहारों,छुट्टियों और विशेष अवसरों पर अक्सर प्लेटफॉर्म टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। मोबाइल एप के माध्यम से टिकट मिलने से यह समस्या काफी हद तक कम होगी। उल्लेखनीय है कि इस एप के जरिए जनरेट किए जाने वाले प्लेटफॉर्म की वैद्यता भी दो घंटे ही रहेगी। 

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में रेलवन एप का उपयोग करें और डिजिटल टिकटिंग की इस सुविधा का लाभ उठाएं, ताकि यात्रा से जुड़ी सेवाएं और अधिक सरल, सुरक्षित तथा सुविधाजनक बन सकें।

लेनदेन में पारदर्शिता और सुविधाएं बढ़ेंगी

इस तरह की डिजिटल सुविधाओं के उपयोग से टिकट काउंटर पर दबाव कम होगा और यात्रियों को तेज व सुगम सेवा मिल सकेगी। साथ ही नकदी लेन-देन की आवश्यकता भी कम होगी जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।

00000//(रिलीज़ आईडी: 2236021)

Wednesday, February 4, 2026

हाथियों से रेल हादसे रोकने के लिए अब नई तकनीक

 PIB//रेल मंत्रालय//Posted on Wednesday 04th February 2026 at 4:56 PM by PIB Delhi

मधुमक्ख्यों की आवाज़ जैसी तरंगें भी हाथियों को पटरी से दूर रखेंगी 

भारतीय रेलवे की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) वितरित ध्वनिक संवेदक (डीएएस) तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ट्रैक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाती है और यह संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों तथा नियंत्रण कक्ष को समय रहते अलर्ट जारी करने के उद्देश्य से डिजाइन की गई है

एनएफआर (403.42 वर्ग किलोमीटर), ईसीओआर (368.70 वर्ग किलोमीटर), एसआर (55.85 वर्ग किलोमीटर), एनआर (52 वर्ग किलोमीटर), एसईआर (55 वर्ग किलोमीटर), एनईआर (99.18 वर्ग किलोमीटर), डब्ल्यूआर (115 वर्ग किलोमीटर) और ईसीआर (20.3 वर्ग किलोमीटर) को कवर करने वाले क्षेत्रों में घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) से संबंधित कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। 


नई दिल्ली
: 04 फरवरी 2026: (पी आई बी- दिल्ली//रेल स्क्रीन डेस्क):: हाथियों और अन्य जानवरों की घुसपैठ रोकने के लिए नई तकनीक 

रेल मंत्रालय ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय से रेल पटरियों पर हाथियों के टकराने से रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए हैं, जो इस प्रकार हैं:

(i) अपनाए गए नवोन्मेषी उपायों में एक प्रमुख पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) का विकास है, जो वितरित ध्वनिक संवेदक (डीएएस) तकनीक के माध्यम से रेलवे ट्रैक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाती है। इस प्रणाली में ऑप्टिकल फाइबर, आवश्यक हार्डवेयर और हाथियों की गतिविधि से संबंधित पूर्व-परिभाषित संकेतों का समावेश किया गया है। यह प्रणाली रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधि की सूचना समय रहते लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों एवं नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाने हेतु चेतावनी संदेश उत्पन्न करती है, जिससे दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए त्वरित व प्रभावी निवारक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

वर्तमान में, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में वन विभाग द्वारा चिन्हित महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील स्थलों पर 141 किलोमीटर से अधिक लंबाई में घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) कार्यरत है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे के विभिन्न चिन्हित गलियारों में भी आईडीएस से संबंधित कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इन गलियारों में एनएफआर (403.42 किलोमीटर), ईसीओआर (368.70 किलोमीटर), एसआर (55.85 किलोमीटर), एनआर (52 किलोमीटर), एसईआर (55 किलोमीटर), एनईआर (99.18 किलोमीटर), डब्ल्यूआर (115 किलोमीटर) और ईसीआर (20.3 किलोमीटर) शामिल हैं।

(ii) हाथियों के साथ ट्रेन की टक्कर की किसी भी घटना की स्थिति में, संबंधित क्षेत्रीय रेलवे वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर मामले की जांच करता है और उसके आधार पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। इन उपायों में चिन्हित संवेदनशील स्थलों पर उपयुक्त गति सीमाओं का निर्धारण, ट्रेन कर्मचारियों एवं स्टेशन मास्टरों को सतर्क करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, ट्रेन कर्मचारियों को अद्यतन जानकारी प्रदान करने और उनकी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संबंधित वन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान ऐसी घटनाओं की औसत संख्या लगभग 16 प्रति वर्ष रही है।

(iii) चिन्हित स्थानों पर हाथियों की आवाजाही के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण।

(iv) रेल लाइनों की ओर हाथियों को आने से रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों में पटरियों के किनारे उपयुक्त बाड़ लगाना।

(v) लोको पायलटों को पूर्व चेतावनी देने के लिए सभी चिन्हित हाथी गलियारों पर साइनेज बोर्ड उपलब्ध कराना।

(vi) रेलवे भूमि के भीतर पटरी के आसपास की वनस्पति और खाद्य पदार्थों की सफाई।

(vii) वन क्षेत्र में सौर प्रणाली के साथ एलईडी लाइटें उपलब्ध कराना।

(viii) स्टेशन मास्टर और लोको पायलटों को सतर्क करने के लिए समय पर कार्रवाई हेतु वन विभाग द्वारा नियुक्त हाथी ट्रैकर्स की तैनाती की जाती है।

(ix) रेल पटरियों के पास जंगली जानवरों/हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए लेवल क्रॉसिंग पर मधुमक्खी की आवाज करने वाले नए उपकरण लगाए गए हैं। इस उपकरण से उत्पन्न ध्वनि हाथियों को रेल पटरी से दूर भगाने का काम करती है।

(x) रात/खराब दृश्यता के दौरान सीधी पटरी पर जंगली जानवरों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए थर्मल विजन कैमरे का भी परीक्षण किया जा रहा है, जो लोको पायलटों को जंगली जानवरों की उपस्थिति के बारे में सचेत करता है।

यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।


****//पीके/केसी/एनके/डीए//(रिलीज़ आईडी: 2223454)****