Saturday, July 18, 2026

रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

 रेल मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 18 July 2026 at 4:11 PM by PIB Delhi

हरी झंडी दिखाई रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 

*रामनगर और देहरादून के बीच पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन से उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच संपर्क उत्तम होगा

*हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के पुनर्विकास में भीड़भाड़ बढ़ाए बिना गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों के लिए उत्तम सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा: श्री अश्विनी वैष्णव

*उत्तराखंड में रेल क्षमता बढ़ाने के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा: केंद्रीय रेल मंत्री

*ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है, यह उत्तराखंड के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए जीवन रेखा बनेगी: श्री पुष्कर सिंह धामी


नई दिल्ली
: 18 जुलाई 2026: (
PIB Delhi//रेल स्क्रीन डेस्क):: 

रेल संचार का नेटवर्क लगातार तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। एक के बाद एक खबरें आ रही हैं। किसी न किसी कोने को देश के दुसरे हिस्सों के साथ सफलता से जोड़ा जा रहा है। रेलों में सुविधाएँ भी बढ़ रही हैं और रफ्तार भी। रेलों का किराया भी आमजन की पहुँच में करने के प्रयास जारी हैं। 

रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस की पहली सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही रामनगर और देहरादून को जोड़ने वाली पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत हुई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस अवसर पर उपस्थित हुए। यह नई ट्रेन इस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा किया है और यह उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को काफी मजबूत करेगी।

एक्सप्रेस ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। ट्रेन संख्या 15310 रामनगर से सुबह 5:50 बजे प्रस्थान करेगी और दोपहर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, ट्रेन संख्या 15309 देहरादून से दोपहर 15:55 बजे प्रस्थान करेगी और रात 23:30 बजे रामनगर पहुंचेगी। यह ट्रेन रास्ते में काशीपुर, रोशनपुर, पिपल्सना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी।

इस ट्रेन में एसी सेकंड क्लास, एसी थर्ड क्लास, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, सेकंड सिटिंग और जनरल सेकंड क्लास के कोच होंगे, जो विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों के लिए आरामदायक यात्रा विकल्प प्रदान करेंगे।

यह नई सेवा उत्तराखंड के नैनीताल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के निवासियों को लाभ पहुंचाएगी, जिनमें छात्र, किसान, व्यापारी और समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। इससे देहरादून और हरिद्वार के लिए सुविधाजनक एक ही दिन में कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे यात्री घर लौटने से पहले अपने आधिकारिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत कार्यों को पूरा कर सकेंगे।

इस ट्रेन से क्षेत्र में पर्यटन और तीर्थयात्रा को बढ़ावा मिलने की भी आशा है। इससे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, रामनगर के पास कोसी नदी के बीच एक विशाल चट्टान पर स्थित गिरिजा देवी मंदिर और सीतामढ़ी/सीतावनी के प्राचीन धार्मिक स्थलों तक उत्तम कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा, हरिद्वार और देहरादून से आगे की कनेक्टिविटी के माध्यम से यात्रियों को बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनात्री सहित चार धाम तीर्थयात्रा मार्ग तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा।

श्री वैष्णव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेगी। यह दोनों शहरों के बीच चलने वाली पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन है और इससे उत्तराखंड के लोगों को तेज, अधिक सुविधाजनक और विश्वसनीय रेल संपर्क मिलने की आशा है।

उन्होंने यह भी बताया कि हरिद्वार पर दबाव कम करने के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें अतिरिक्त क्षमता सृजित करना और हरिद्वार और ऋषिकेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी में सुधार करना शामिल है।

श्री वैष्णव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उत्तराखंड में रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने आगे बताया कि राज्य में 11 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लाल कुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर शामिल हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना इस प्रकार बनाई जा रही है कि गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भीड़भाड़ न बढ़े। रेल से जुड़ी अन्य पहलों के बारे में बताते हुए, श्री वैष्णव ने बताया कि हाल ही में शुरू की गई टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इस इलाके में वंदे भारत सेवाएं भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस का शुभारंभ उत्तराखंड में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नई रेल सेवा शुरू होने पर राज्य के लोगों को बधाई दी और इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में रेल संपर्क में हाल के वर्षों में काफी सुधार हुआ है और राज्य भर में कई नई रेल सेवाएं शुरू की गई हैं। श्री धामी ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह उत्तराखंड के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए जीवन रेखा साबित होगी।

इसके अलावा, श्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड को रेलवे के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जबकि राज्य में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाएं वर्तमान में कार्यान्वयन के अधीन हैं। हरिद्वार में रेलवे विकास का जिक्र करते हुए श्री धामी ने कहा कि आगामी कुंभ महोत्सव को देखते हुए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ट्रेन सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

हरिद्वार निर्वाचन क्षेत्र के सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल निर्वाचन क्षेत्र के सांसद अनिल बलुनी और वरिष्ठ रेलवे अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल हुए।

***//पीके/केसी/केएल/एनके//(रिलीज़ आईडी: 2286107) 


Friday, March 6, 2026

मोबाइल से निकालो प्लेटफॉर्म टिकट,भीड़ से पाओ राहत

 रेल मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 06 MAR 2026 at 5:32PM by PIB Jaipur 

 वैद्यता पूर्ववत दो घंटे//रेलवे का यात्री सुविधा हेतु डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा 


जयपुर
: 06 मार्च 2026:(PIB Jaipur//रेल स्क्रीन डेस्क)::

रेलवे यात्रियों को बेहतर और त्वरित सुविधाएं देने के लिए लगातार डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दे रहा है। इसी क्रम में अब यात्री अपने मोबाइल फोन के माध्यम से ही प्लेटफॉर्म टिकट प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए रेलवे द्वारा शुरू किए गए रेलवन एप का उपयोग किया जा सकता है। इस सुविधा के शुरू होने से स्टेशन पर टिकट खिड़की के सामने लगने वाली लंबी कतारों से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।

जोधपुर मंडल के सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार यात्रियों को अब प्लेटफॉर्म टिकट लेने के लिए काउंटर तक जाने की आवश्यकता नहीं है। वे अपने मोबाइल में रेलवन एप डाउनलोड कर आसानी से प्लेटफॉर्म टिकट बुक कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि एप से टिकट बुकिंग की प्रक्रिया सरल है और कुछ ही मिनटों में टिकट जारी हो जाता है। टिकट जारी होने के बाद उसका डिजिटल स्वरूप मोबाइल में उपलब्ध रहता है,जिसे स्टेशन पर जांच के समय दिखाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म टिकट की यह व्यवस्था यात्रियों के समय की बचत के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन में भी सहायक होगी। त्योहारों,छुट्टियों और विशेष अवसरों पर अक्सर प्लेटफॉर्म टिकट लेने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। मोबाइल एप के माध्यम से टिकट मिलने से यह समस्या काफी हद तक कम होगी। उल्लेखनीय है कि इस एप के जरिए जनरेट किए जाने वाले प्लेटफॉर्म की वैद्यता भी दो घंटे ही रहेगी। 

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में रेलवन एप का उपयोग करें और डिजिटल टिकटिंग की इस सुविधा का लाभ उठाएं, ताकि यात्रा से जुड़ी सेवाएं और अधिक सरल, सुरक्षित तथा सुविधाजनक बन सकें।

लेनदेन में पारदर्शिता और सुविधाएं बढ़ेंगी

इस तरह की डिजिटल सुविधाओं के उपयोग से टिकट काउंटर पर दबाव कम होगा और यात्रियों को तेज व सुगम सेवा मिल सकेगी। साथ ही नकदी लेन-देन की आवश्यकता भी कम होगी जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।

00000//(रिलीज़ आईडी: 2236021)

Wednesday, February 4, 2026

हाथियों से रेल हादसे रोकने के लिए अब नई तकनीक

 PIB//रेल मंत्रालय//Posted on Wednesday 04th February 2026 at 4:56 PM by PIB Delhi

मधुमक्ख्यों की आवाज़ जैसी तरंगें भी हाथियों को पटरी से दूर रखेंगी 

भारतीय रेलवे की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) वितरित ध्वनिक संवेदक (डीएएस) तकनीक का उपयोग करते हुए रेलवे ट्रैक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाती है और यह संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों तथा नियंत्रण कक्ष को समय रहते अलर्ट जारी करने के उद्देश्य से डिजाइन की गई है

एनएफआर (403.42 वर्ग किलोमीटर), ईसीओआर (368.70 वर्ग किलोमीटर), एसआर (55.85 वर्ग किलोमीटर), एनआर (52 वर्ग किलोमीटर), एसईआर (55 वर्ग किलोमीटर), एनईआर (99.18 वर्ग किलोमीटर), डब्ल्यूआर (115 वर्ग किलोमीटर) और ईसीआर (20.3 वर्ग किलोमीटर) को कवर करने वाले क्षेत्रों में घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) से संबंधित कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। 


नई दिल्ली
: 04 फरवरी 2026: (पी आई बी- दिल्ली//रेल स्क्रीन डेस्क):: हाथियों और अन्य जानवरों की घुसपैठ रोकने के लिए नई तकनीक 

रेल मंत्रालय ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय से रेल पटरियों पर हाथियों के टकराने से रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए हैं, जो इस प्रकार हैं:

(i) अपनाए गए नवोन्मेषी उपायों में एक प्रमुख पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) का विकास है, जो वितरित ध्वनिक संवेदक (डीएएस) तकनीक के माध्यम से रेलवे ट्रैक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाती है। इस प्रणाली में ऑप्टिकल फाइबर, आवश्यक हार्डवेयर और हाथियों की गतिविधि से संबंधित पूर्व-परिभाषित संकेतों का समावेश किया गया है। यह प्रणाली रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधि की सूचना समय रहते लोको पायलटों, स्टेशन मास्टरों एवं नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाने हेतु चेतावनी संदेश उत्पन्न करती है, जिससे दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए त्वरित व प्रभावी निवारक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

वर्तमान में, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में वन विभाग द्वारा चिन्हित महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील स्थलों पर 141 किलोमीटर से अधिक लंबाई में घुसपैठ पहचान प्रणाली (आईडीएस) कार्यरत है। इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे के विभिन्न चिन्हित गलियारों में भी आईडीएस से संबंधित कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इन गलियारों में एनएफआर (403.42 किलोमीटर), ईसीओआर (368.70 किलोमीटर), एसआर (55.85 किलोमीटर), एनआर (52 किलोमीटर), एसईआर (55 किलोमीटर), एनईआर (99.18 किलोमीटर), डब्ल्यूआर (115 किलोमीटर) और ईसीआर (20.3 किलोमीटर) शामिल हैं।

(ii) हाथियों के साथ ट्रेन की टक्कर की किसी भी घटना की स्थिति में, संबंधित क्षेत्रीय रेलवे वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर मामले की जांच करता है और उसके आधार पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। इन उपायों में चिन्हित संवेदनशील स्थलों पर उपयुक्त गति सीमाओं का निर्धारण, ट्रेन कर्मचारियों एवं स्टेशन मास्टरों को सतर्क करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, ट्रेन कर्मचारियों को अद्यतन जानकारी प्रदान करने और उनकी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संबंधित वन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान ऐसी घटनाओं की औसत संख्या लगभग 16 प्रति वर्ष रही है।

(iii) चिन्हित स्थानों पर हाथियों की आवाजाही के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण।

(iv) रेल लाइनों की ओर हाथियों को आने से रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों में पटरियों के किनारे उपयुक्त बाड़ लगाना।

(v) लोको पायलटों को पूर्व चेतावनी देने के लिए सभी चिन्हित हाथी गलियारों पर साइनेज बोर्ड उपलब्ध कराना।

(vi) रेलवे भूमि के भीतर पटरी के आसपास की वनस्पति और खाद्य पदार्थों की सफाई।

(vii) वन क्षेत्र में सौर प्रणाली के साथ एलईडी लाइटें उपलब्ध कराना।

(viii) स्टेशन मास्टर और लोको पायलटों को सतर्क करने के लिए समय पर कार्रवाई हेतु वन विभाग द्वारा नियुक्त हाथी ट्रैकर्स की तैनाती की जाती है।

(ix) रेल पटरियों के पास जंगली जानवरों/हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए लेवल क्रॉसिंग पर मधुमक्खी की आवाज करने वाले नए उपकरण लगाए गए हैं। इस उपकरण से उत्पन्न ध्वनि हाथियों को रेल पटरी से दूर भगाने का काम करती है।

(x) रात/खराब दृश्यता के दौरान सीधी पटरी पर जंगली जानवरों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए थर्मल विजन कैमरे का भी परीक्षण किया जा रहा है, जो लोको पायलटों को जंगली जानवरों की उपस्थिति के बारे में सचेत करता है।

यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।


****//पीके/केसी/एनके/डीए//(रिलीज़ आईडी: 2223454)****