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Wednesday, March 27, 2013

संशोधित तत्‍काल शुल्‍क

रेल यात्रा के लिए संशोधित तत्‍काल शुल्‍क पहली अप्रैल 2013 से लागू
रेल बजट 2013-14 में की गई घोषणा के अनुसार रेल मंत्रालय ने तत्‍काल शुल्‍क को संशोधित करने का निर्णय लिया है। यात्रा के लिए संशोधित शुल्‍क 1 अप्रैल, 2013 से लागू होंगे। अब तत्‍काल शुल्‍क आरक्षित द्वितीय श्रेणी (2एस) के बुनियादी किराये के 10 प्रतिशत और अन्‍य सभी श्रेणियों के लिए बुनियादी किराये के 30 प्रतिशत तक के अनुसार लिए जायेगे। इसमें न्‍यूनतम और अधिकतम शुल्‍क   निम्‍न तालिका में दिखाये गए है:-  
यात्रा की श्रेणी
निम्‍नतम तत्‍काल शुल्‍क (रूपये में)
अधिकतम तत्‍काल शुल्‍क (रूपये में)
आरक्षित द्वितीय सीट(2एस) 
10
15
शयनयान
90
175
वातानुकूलित चेयर कार
100
200
वातानुकूलित-3 टियर
250
350
वातानुकूलित-2 टियर 
300
400
एक्‍जीक्‍यूटिव
300
400

मीणा/विजयलक्ष्मी/सुमन–1610

Sunday, February 24, 2013

सतत् अपशिष्ट प्रबंधन की एक कहानी

06-फरवरी-2013 15:34 IST
रेलवे प्लेटफार्म के निर्माण में शहरी ठोस अपशिष्ट का प्रयोग 
स्‍वच्‍छता:विशेष लेख:                                               * एम. जैकब अब्राहम
                                                                 File Photo of  Beas Rly Station by Rector Kathuria
तिरुवनंतपुरम शहर में ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन संकट के प्रभावी समाधान के उद्देश्‍य से भारतीय रेल ने केरल सरकार के सुचितवा मिशन के साथ सहयोग किया है। राज्‍य की राजधानी में शहरी अपशिष्‍ट निपटान उस समय राष्‍ट्रीय मीडिया के सुर्खियों में आया, जब नज़दीक की विलाप्पिलसाला पंचायत में प्रस्‍तावित अपशिष्‍ट शोधन संयंत्र के विरोध में लोगों ने अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया।
     इस संदर्भ में सुचितवा मिशन और दक्षिण रेलवे द्वारा किया गया प्रयास सराहनीय है। 
     मुरूक्‍कुमपुझा रेलवे स्‍टेशन का 40 मीटर लंबा तथा 6 मीटर प्‍लेटफॉर्म इस प्रयास का एक उदाहरण है। दक्षिण रेलवे द्वारा निर्मित इस प्‍लेटफॉर्म में इस राज्‍य की राजधानी शहर से एकत्रित अपशिष्‍ट का प्रयोग किया गया है। यह नवनिर्मित रेलवे प्‍लेटफॉर्म देश में रेल नेटवर्क पर स्‍थापित इस तरह का पहला प्‍लेटफॉर्म है, जहां शहरी ठोस अपशिष्‍ट का प्रयोग भूमि-भराव के रूप में किया गया है। राज्‍य और रेलवे के बीच एक करार के तहत शहरी कूड़ा- कर्कट का प्रयोग भूमि -भराव में किया जाता है। इस करार के तहत आवश्‍यक कचरा    तिरूवनन्‍तपुरम नगर निगम द्वारा उपलब्‍ध कराया गया। जैविक रूप से नष्‍ट नहीं होले वाले लगभग 600 टन कचरे का प्रयोग मुरूक्‍कुमपुझा रेलवे स्‍टेशन के प्‍लेटफॉर्म-2 के निर्माण में प्रयोग किया गया। रंगीन इंटरलॉकिंग टाइल्‍स से निर्मित इस प्‍लेटफॉर्म के अंदर प्रयोग किये गए कचरे का जरा सा भी पता नहीं चलता। इस प्‍लेटफॉर्म का निर्माण 540 मीटर लंबाई तक किया जाना था, लेकिन स्‍थानीय लोगों द्वारा भराव के लिए कचरे के प्रयोग के विरोध के कारण 40 मीटर लंबाई तक ही कार्य पूरा किया जा सका।
     पर्यावरण की सुरक्षा तथा प्रदूषण के अंदर भूमि में पहुंचने और उससे संभावित भू-जल को प्रदूषित होने से रोकने में भराव क्षेत्र सबसे सुरक्षित और आधुनिक विधि समझा जाता है। नगर पालिका ठोस अपशिष्‍ट भूमि भराव में सि‍न्‍थेटिक लाइन में प्‍लास्टिक का प्रयोग भराव क्षेत्र को एक-दूसरे से अलग करने में किया जाता है। अमरीका में उत्‍पादित अपशिष्‍ट के लगभग 55 प्रतिशत का प्रयोग भूमि भराव में किया जाता है, जबकि ब्रिटेन में लगभग 90 प्रतिशत अपशिष्‍ट का निपटान इस तरीके से किया जाता है।
     निर्माण प्रक्रिया में मोटे प्‍लास्टिक की चादर का प्रयोग चिन्हित स्‍थल तथा कचरे और भूमि की परत के बीच किया जाता है, जो 30 सेंटीमीटर तक फैला होता है। प्रत्‍येक बार इस फैलाव को रोलर द्वारा दबाया जाता है। जब यह फैलाव आवश्‍यक ऊंचाई पर पहुंच जाता है, तो उस पर लाल मिट्टी की एक परत बिछाई जाती है। सौंदर्यीकरण की दृष्टि से ऊपरी हिस्‍से पर कॉबल पत्‍थर या इंटरलॉकिंग टाइल्‍स लगाई जाती है। भराव के लिए कचरे का प्रयोग कर रेलवे ने निर्माण प्रक्रिया में दस लाख रुपये की बचत की। इस नये प्रयोग के लिए स्‍थानीय लोगों का सहयोग मिलने पर दक्षिण रेलवे प्‍लेटफॉर्म के शेष बचे 500 मीटर निर्माण कार्य के लिए तैयार हैं।
     मुरूक्‍कुमपुझा प्‍लेटफॉर्म में सफल निर्माण कार्य के बाद दक्षिण रेलवे का तिरूवनन्‍तपुरम रेलवे डीविजन आगे चलकर नजदीकी रेलवे स्‍टेशन कोचुवेली में भी इसी तकनीक का प्रयोग कर प्‍लेटफॉर्म के निर्माण की योजना तैयार की है। कोचुवेली में निर्मित किये जाने वाले प्‍लेटफॉर्म का आकार 540 मीटर लंबा और 5.5 मीटर चौड़ा है। यदि स्‍थानीय लोग इस प्रयोग में सहयोग करते हैं, तो दक्षिण रेलवे की केरल -तमिलनाडु सीमा पर स्थित परसाला स्‍टेशन पर भी प्‍लेटफॉर्म विस्तार की योजना है।  सुचितवा मिशन के अनुसार, भूमि- भराव के लिए शहरी अपशिष्‍ट का प्रयोग अपशिष्‍ट निपटान के लिए पूर्णत: सुरक्षित तरीका है, जिससे पारिस्‍थितिकी और पर्यावरण का भी संरक्षण होता है। (PIB)


* उप निदेशक, पत्र सूचना कार्यालय, तिरूवनन्‍तपुरम
वि. कासोटिया/आनन्‍द/इन्‍द्रपाल/शौकत - 38

Thursday, January 24, 2013

अनुमानित राजस्‍व 89906.46 करोड़ रुपये रहा

23-जनवरी-2013 14:50 IST
भारतीय रेलवे ने 2012 में हासिल किये नये मुकाम 
    प्रारंभिक आधार पर 01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 के दौरान भारतीय रेलवे का कुल अनुमानित राजस्‍व 89906.46 करोड़ रुपये रहा, जबकि यह राशि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 75009.17 करोड़ रुपये था और इस प्रकार इसमें 19.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। माल ढुलाई से प्राप्‍त होने वाली आय 01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2011 दौरान 49868.95 करोड़ रुपये रहा, जो  01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 के अवधि के दौरान बढ़कर 62413.41 करोड़ रुपये हो गया और इस प्रकार इसमें 25.15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यात्रि से प्राप्‍त होने वाली आय एक अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 अवधि के दौरान पिछले वर्ष के इसी अवधि के दौरान प्राप्‍त आय 20999.01 करोड़ रुपये से बढ़कर 23025.34 करोड़ रुपये हो गया और इस प्रकार इसमें 9.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कैलेंडर वर्ष 2012 के दौरान नवम्‍बर, 2012 तक भारतीय रेलवे ने कुल 3903.84 करोड़ रुपये की स्‍क्रैप की बिक्री की है, जबकि पिछले वर्ष के इसी अवधि के दौरान कुल बिक्री 3748.68 करोड़ रुपये की हुई है।
    अनुमानित कुल यात्रियों की बुकिंग 01 अप्रैल से 31 दिसम्‍बर, 2012 के अवधि के दौरान पिछले वर्ष के इसी अवधि के 6210.12 मिलियन की तुलना में 6422.29 मिलियन रहा। इस प्रकार इसमें 3.42 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई। भारतीय रेलवे ने अप्रैल से दिसम्‍बर, 2012 के अवधि के दौरान 735.10 मिलियन टन की माल ढुलाई की है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 703.77 मिलियन टन रही और इस प्रकार इसमें 31.33 मिलियन टन माल ढुलाई की वृद्धि हुई, जिससे 4.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
    रेल मंत्रालय द्वारा उठाये गए ठोस कदम के तहत फरवरी, 2012 में विशेष प्रयोजन माध्‍यम (एस पी वी) भारतीय रेलवे स्‍टेशन विकास निगम लिमिटेड (आईआरएसडीएल) की स्‍थापना एक समझौते के तहत की गई। इसका उद्देश्‍य देश में रेलवे स्‍टशनों के पुनर्विकास कार्य के साथ-साथ स्‍टेशनों का रख-रखाव करना है। इस नये एसपीवी के तहत चिन्हित स्‍टेशनों पर पर्याप्‍त स्‍थानयुक्‍त प्रतीक्षालय, पलेटफॉर्मों पर आसानी से पहुंचना तथा इसे भीड़-भाड़ से मुक्‍त बनाने के साथ-साथ उच्‍च स्‍तरीय खान-पान सुविधाओं सहित होटल और अन्‍य सुविधाओं का प्रस्‍ताव करना है। प्रारंभिक अध्‍ययन और क्षेत्रीय रेलवे के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद पांच स्‍टेशन -बिजवासन (दिल्‍ली), हबीबगंज (भोपाल), आनन्‍द विहार (दिल्‍ली), चंडीगढ़, शिवाजी नगर (पुणे) का चयन किया गया है, जहां कार्यान्‍वयन पहले चरण में आईआरएसडी के जरिए किया जाएगा।
     एक महत्‍वपूर्ण पहल के तहत वास्‍तविक और वैध यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने और आरक्षित  टिकट प्रणाली के दुरुपयोग में बिचौलियों तथा अवांछित तत्‍वों की भूमिका खत्‍म करने के लिए रेल मंत्रालय ने सभी आरक्षित टिकट श्रेणियों में या‍त्रा के दौरान पहचान पत्र का मूल प्रमाण पत्र रखना अब अनिवार्य कर दिया गया है। मूल पहचान प्रमाण पत्र के बिना यात्रा करने वाले लोगों को बे-टिकट समझा जाएगा और यात्रा के दौरान उचित प्रभार वसूला जाएगा। नीति में बदलाव लाने का उद्देश्‍य वास्‍तविक और वैध यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाना और हस्तांतरित टिकटों पर यात्रा करने वालों की जांच करना है। इस नीति के प्रावधान को सुरक्षा व्‍यवस्‍था के लिए भी उपयोगी समझा जा रहा है।
    वर्ष 2012 के दौरान रेलवे के ढांचागत परियोजनाओं पर विशेष ध्‍यान दिया गया। नवम्‍बर, 2012 के अंतिम सप्‍ताह के दौरान प्रधानमंत्री के अध्‍यक्षता में संरचना पर हुई बैठक में समीक्षा के बाद महत्‍वपूर्ण संरचना परियोजनाएं जैसे- मुम्‍बई में एलिवेटेड रेल कॉरीडोर, सार्वजनिक - निजी भागीदारी के आधार पर लोकोमोटिव फैक्‍टरी, रेल टैरिफ प्राधिकरण तथा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर की स्‍थापना के लिए तय सीमा निर्धारित की गई है। इन मुद्दों पर रेलवे मंत्रालय द्वारा समयबद्ध कार्या योजना तैयार की गई है। मुम्‍बई विश्‍व में सबसे अधिक भीड़-भाड़ और दबाव वाले उपनगरीय प्रणालियों में से एक है। कॉरीडोर पर क्षमता दबाव को देखते हुए रेल मंत्रालय ने क्षमता प्रणाली का और विस्‍तार करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत चर्चगेट-वीरा सेक्‍शन के साथ एलिवेटेड कॉरीडोर को दो मार्ग का बनाना है। यह नया एलिवेटेड रेल कॉरीडोर (ईआरसी) ओवल मैदान और पश्चिमी रेलवे के विरार क्षेत्र में होगा। 63.27 किलोमीटर लंबे ईआरसी परियोजना पर लगभग 21,000 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है। इस कॉरीडोर के तहत 26 स्‍टेशन बनाए जाएंगे, जिसमें पांच भूमिगत, 19 एलिवेटेड और दो ग्रेड पर स्थित होंगे।
    महत्‍वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण उधमपुर - बारामुला- श्रीनगर रेल लिंक परियोजना के बनिहाल-काजीगुंड खंड को पूरा कर भारतीय रेलवे ने परिवहन क्षेत्र में भी एक लंबी छलांग लगाई है। इस खंड पर ट्रायल शुरू कर दिया गया है, इस खंड पर सभी प्रमुख कार्य पूरे कर लिये गए हैं और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह खंड जल्‍द ही शुरू कर दिया जाएगा और 17.729 किलोमीटर लंबी इस खंड पर 11.215 किलोमीटर लंबाई की सुरंग है, जिसे पीर पंजाल सुरंग कहा जाता है। यह सुरंग भारत में सबसे लं‍बी और एशिया की दूसरी सबसे लंबी परिवहन सुरंग है।
    इस वर्ष भारतीय रेलवे की महत्‍वाकांक्षी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (डीएफसी) के कार्यान्‍वयन पर जोर दिया गया। मुम्‍बई में जवाहर लाल नेहरू पत्‍तन (जीएनपीटी) से नई दिल्‍ली के नजदीक दादरी/ तुगलकाबाद के बीच 1499 किलोमीटर लंबी पश्चिमी डीएफसी और पंजाब में लुधियाना से से कोलकाता के डानकुनी के बीच 1839 किलोमीटर लंबी पूर्वी डीएफसी नामक दोनों कॉरीडोर में काफी प्रगति आई है। भूमि अधिग्रहण में भी प्रगति देखी जा रही है और नवम्‍बर, 2012 तक कुल 10703 हेक्‍टेयर भूमि में से दोनों कॉरीडोर  के लिए 7768 हेक्‍टेयर भूमि अर्थात 73 प्रतिशत का अधिग्रहण किया जा चुका है। जेआईसीए के जरिए पश्चिमी डीएफसी के लिए प्रारंभिक वित्‍तीयन समझौता और विश्‍व बैंक के जरिए पूर्वी डीएफसी (लुधियान-खुरजा-कानपुर-मुगलसराय) के खंड के लिए वित्‍तीयन समझौते को अंतिम रूप दिया गया है, जबकि पूर्वी डीएफसी के डानकुनी - सोननगर खंड के लिए पीपीपी के जरिए कार्यान्‍वयन का प्रस्‍ताव किया गया है तथा पूर्वी डीएफसी के मुगलसराय- सोननगर खंड का क्रियान्‍वयन रेल मंत्रालय के संसाधन द्वारा किया जा रहा है।
    स्‍वच्‍छ भारत अभियान पर पर्यटन मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच एक समझौता किया गया, जिसके तहत दोनों मंत्रालय मिलकर रेल यात्रियों के लिए सतत जागरुक अभियान की ओर कार्य करेंगे। साथ ही पर्यटन मंत्रालय के सेवा प्रदाता क्षमता निर्माण योजना के तहत सेवा प्रदान करने के लिए कार्य करेंगे तथा संबंधित हितधारकों से विचार-विमर्श और परामर्श कर स्‍टेशनों और कोचों की साफ-सफाई और उनके रखरखाव के लिए रणनीति तैयार करेंगे। इस बीच, रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है, जिसमें रेलवे परिसर में स्‍वच्‍छता और साफ-सफाई को प्रभावित करने वाले गतिविधियों को रोकने संबं‍धी नियम के साथ-साथ इन नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान है, लेकिन जो कोई भी दिये गए नियमों के किसी भी प्रावधान का उल्‍लंघन नहीं करता है तो नियमों के तहत पांच सौ रुपये का जुर्माना किया जाएगा। 
           देश में डिजायन किए गए विकसित और विनिर्मित वातानुकूलित डबल डेकर रेलगाडियों को पहली बार हावड़ा और धनबाद के बीच चलाया गया। इस वर्ष इस रेलगाडी के डिजायन में और भी सुधार कर इसे विकसित किया गया है और जयपुर और दिल्ली तथा अहमदाबाद और मुंबई के बीच पेश किया गया है। निकट भविष्य में हबीबगंज-इंदौर और चेन्नई-बंगलौर के बीच इस तरह की सेवाओं की योजना तैयार की गई है। वातानुकूलित डबल डेकर रेलगाडी में प्रति कोच 120 यात्रियों की क्षमता है और यात्रियों के बीच यह लोकप्रिय हो रहा है।
     रेलवे बोर्ड के निरंतर प्रयासों और मंडलीय रेलवे के ऊर्जा संरक्षण प्रयासों से वर्ष 2012 के दौरान 773 आवेदनों के कुल 87 पुरस्कारों में से भारतीय रेलवे को सर्वाधिक 11 राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुए। 14 दिसंबर 2012 को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा यह प्रदान किया गया।
     भारतीय रेलवे ने सुरक्षा में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास किया है। रेलवे सुरक्षा और चेतावनी प्रणाली (टीपीडब्ल्यूएस) को उत्तर/उत्तर मध्य रेलवे के हजरत निजामुद्दीन-आगरा मार्ग (200 किलोमीटर मार्ग) पर पायलट आधार पर विस्तृत किया गया है जहां कार्य प्रगति पर है। एसीडी और टीपीडब्ल्यूएस प्रणाली से प्राप्त अनुभव के आधार पर भारतीय रेलवे ने रेलगाडी टक्कर परिहार प्रणाली (टीसीएएस) के विकास का बीडा उठाया है। यह टीपीडब्ल्यूएस और एसीडी का मिश्रण होगा और खतरनाक स्थिति में सिग्नल देने और टक्कर को रोकने में कारगर होगा। अभिरुचि का हित आमंत्रित करने के बाद छह भारतीय फर्मों को चुना गया है। इनमें से एक फर्म ने प्रोटोटाइप का विकास किया है जिसका ट्रायल दक्षिण मध्य रेलवे में अक्तूबर 2012 को किया गया।
     रेलवे उपयोगकर्ताओं को और भी सहूलियत देने के लिए भारतीय रेलवे ने भारतीय रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) के जरिए मोबाइल फोन के द्वारा ई-टिकट आरक्षित करने की सुविधा मुहैया करा रहा है। शुरुआती पंजीकण और उपयुक्त सॉफ्टवेयर को मोबाइल पर डाउनलोड करके इंटरनेट सुविधा के साथ मोबाइल द्वारा टिकट आरक्षित करना काफी आसान है। बुकिंग के बाद यात्री को आरक्षण का संदेश टिकट के पूरे ब्यौरे जिसमें पीएनआर, रेलगाडी संख्या, यात्रा की तिथि और वर्ग आदि शामिल है, के साथ मिल जाता है। मुद्रित ई-टिकट से बेहतर समझा जाता है।
     अपने यात्रियों और कर्मचारियों को स्वच्छ माहौल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के सथ ही भारतीय रेलवे ने अपने पैंसेजर कोचों के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के साथ मिलकर पर्यावरण अनुकूल जैव-शौचालयों को विकसित किया है। इन जैव-शौचालयों में मानव मल बैक्टिरिया द्वारा उपचारित होता है जो कि मनुष्यों के लिए हितकर है। यह बैक्टिरिया मानव मल को पानी और गैस (मीथेन और कार्बन-डाइऑक्साइड) में बदल देता है। गैस वातावरण में मिल जाते हैं दूषित जल का क्लोरिनेशन कर दिया जाता है। इससे मानव मल परटरियों पर नहीं फैलता। आठ रेलगाडियों में वर्ष 2012-13 के दैरान 436 जैव-शैचालयों को स्थापित किया गया है, इसके अलावा 2500 और जैव-शौचालयों को प्रस्तुत का जाएगा। 2016-17 तक नए कोचों को पूरी तरह से जैव-शौचालयों से युक्त कर दिया जाएगा और तेरहवीं पंचवर्षीय योजना यानि 2021-22 के दौरान डायरेक्ट डिस्चार्ज यात्रि कोच शौचालय प्रणाली को समाप्त करने का लक्ष्य है।
     इज्जत योजना के तहत यात्रा दूरी को 100 किलोमीटर से बढ़ाकर 150 किलोमीटर तक कर दिया गया है। अन्य नियम और शर्तों में कोई बदलाव नहीं है।  इज्जत मासिक टिकट खरीद (एमएसटी) पर यह मान्य है  जो कि एक जून 2012 को अथवा इसके बाद लिया गया हो। यह योजना असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन लोगों के लिए है जिनकी मासिक आय 1500/-रुपए से अधिक नहीं है।
     रेलगाडियों और स्टेशनों दोनों पर केटरिंग सेवाओं के निरीक्षण और निगरानी  को मजबूत बनाया गया है जिसकी वजह से शिकायतों की संख्या में  कैलेंडर वर्ष (अक्तूबर 2012 तक) के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.82 प्रतिशत (लगभग) की कमी हुई है। जनवरी से अक्तूबर 2012 के दौरान लगभग 26860 बार मंडलीय रेलवे द्वारा केटरिंग की गुणवत्ता की जांच की गई। केटरिंग सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए  भारतीय रेलवे की केटरिंग सेवाओं के लिए टेंडर प्रदान करने के लिए मानक निविदा दस्तावेज (एसबीडी) तैयार किया गया है।
     लोगों को रेलगाडी के चलने की सही जानकारी के लिए भारतीय रेलवे ने सूचना सुविधा के दायरे को बढ़ाया है। अब सभी रेलगाडियों के लिए www.trainenqiry.com पर उनके चलने की जानकारी उपलब्ध है। इसी प्रकार यह सेवा 139 पर एसएमएस द्वारा भी उपलब्ध है। इससे पहले केवल 36 महत्वपूर्ण रेलगाडियों (शताब्दी, राजधानी और दुरंतों) के चलने की जानकारी ही   www.simran.in  पर तथा 9415139139 पर एसएमएस द्वारा उपलब्ध थी।
     भारतीय रेलवे अधिक सुरक्षित, तीव्र, स्वच्छ और आरादमदायक यात्रि रेलगाडियों के लिए व्यापक रणनीति अपना रहा है। इसके लिए पहले उच्च गति की रेलगाडियों के लिए सात गलियारों की पहचान की गई है। यह गलियारें पीपीपी के जरिए स्थापित किए जाएंगे। शुरु में, मुंबई-अहमदाबाद गलियारे को लिया गया है जिसका पूर्व-व्यवहारिक अध्य्यन पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई मार्ग पर भी जापान के साथ अध्य्यन किया जा रहा है ताकि पैसेंजर रेलगाडियों की गति को 160 किलोमीटर प्रति घंटा से बढाकर 200 किलोमीटर प्रति घंटा किया जा सके। तीसरे भारतीय रेलवे अक्वारिंग इलेक्ट्रिकल मल्टिपल युनिट (ईएमयू) की अवधारणा पर भी काम कर रहा है। इससे तीव्र और सुरक्षित यात्रा  में मदद मिलेगी।
     भारतीय रेलवे और राज्य सरकार के साझेदारी मॉडल को जारी रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य में रेल गलियारों के विकास के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यात्रियों और माल के लिए तीन रेल गलियारों का विकास छत्तीसगढ राज्य के उत्तरी क्षेत्र में किया जाएगा। यह लगभग कुल 453 किलोमीटर लंबाई का होगा। ये गलियारे इस प्रकार हैं- 1. पूर्वी गलियारा- भूपदेवपुर-घरघोदा-धर्मजयगढ़ कोबरा तक  लगभग 180 किलोमीटर लंबाई 2. उत्तरी गलियारा- सुरजापुर-पार्सा-कटघोरा-कोबरा , लगभग 150 किलोमीटर लंबाई और 3. पूर्वी-पश्चिमी गलियारा- गेवरा रोड से पेंड्रा रोड तक लगभग 122 किलोमीटर लंबाई। यह परियोजनाएं विशिष्ट स्पेशल पर्पज व्हेकल (एसपीवी) द्वारा लागू की जाएगी।
     रिक्तियों को भरना प्राथमिकता है और रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा इसे सक्रियता से किया जा रहा है। वर्ष 2012 में 271 वर्गों के लिए 14 लिखित परिक्षाएं हुई जो कि 50515 रिक्तियों के लिए थीं। पिछले 11 महीनों यानि एक जनवरी 2012 से 30 नवंबर 2012 की अवधि के दौरान मंडलीय रेलवे/ प्रोडक्शन युनिटों को सुरक्षा वर्ग के पदों के लिए खासतौर पर 15,838 उम्मीदवारों का पैनल दिया गया है। 2012 में 138 वर्गों के लिए 27,038 रिक्तियों के लिए पांच केन्द्रीकृत अधिसूचनाएं जारी की गई। इनमें से 26,213 रिक्तियों के लिए इस वर्ष चार अधिसूचनाओं के लिए परीक्षाएं कराई जा चुकी हैं।
     लंदन ओलंपिक 2012 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रेलवे मंत्रालय ने रेलवे के खिलाडियों का सम्मान किया। उन्हें एक शॉल, स्मृति पत्र और पुरस्कार राशि का चैक प्रदान किया गया। सुशील कुमार जिन्होंने लंदन ओलंपिक में कुश्ती (66 भारवर्ग फ्री स्टाइल) में रजत पदक जीता उन्हें 75 लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया। निशानेबाजी (50 मीटर प्रोन) के अंतिम दौर में चौथा स्थान हासिल करने वाले जॉयदीप कर्माकर और गोला फेंक में 7वां सथान पाने वाली श्रीमती कृष्णा पूनिया को 25 लाख का नकद पुरस्कार दिया गया। देश में खेलों को बढावा देने के लिए रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड को वर्ष 2012 के लिए “राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार” दिया गया जो कि युवा मामलों और खेल मंत्रालय द्वारा घोषित राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का भाग है।

     अन्य देशों के साथ रेलवे क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग एक अग्रसर प्रक्रिया है। भारत और चीन ने अन्य के साथ, रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग पर सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों देश उच्च गति रेल, भारी वहन शुल्क और स्टेशन विकास सहित रेलवे प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देंगे। भारतीय रेलवे और बेल्जियम के बीच भी दोनों देशों के बीच रेलवे क्षेत्र के प्रभावी विकास और आधुनिकीकरण के लिए द्विपक्षीय सहयोग पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा भारत सरकार और स्पेन सरकार के बीच रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। स्विट्जरलैंड और जर्मनी के साथ भी अलग अलग रुप से रेलवे क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर वार्ता की गई। (PIB)

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मीणा/विजयलक्ष्‍मी/आनन्‍द/शौकत-27

Saturday, December 15, 2012

संसद में सवाल जवाब

2 जोड़ी एसी डबल डेकर सेवाओं की घोषणा की गई 
रेल मंत्रालय में राज्‍य मंत्री श्री कोटला जय सूर्य प्रकाश रेड्डी ने भीड-भाड वाले रेलमार्गों पर डबल डेकर रेलगाडियां चलाने के बारे में पूछे गए एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में आज राज्‍य सभा में बताया कि 2012-13 के रेल बजट में निम्‍नलिखित 2 जोड़ी एसी डबल डेकर सेवाओं की घोषणा की गई है:- 1. 22625/22626 चेन्‍नै-बेंगलोर एसी डबल डेकर एक्‍सप्रेस (प्रतिदिन)। 
2. 22183/22184 हबीबगंज-इंदौर एसी डबल डेकर एक्‍सप्रेस (प्रतिदिन)। 
उन्‍होंने यह भी बताया कि डबल डेकर सेवाओं सहित नई गाड़ी सेवाएं शुरू करना एक सतत् प्रक्रिया है बशर्ते कि परिचालनिक व्‍यवहार्यता, यातायात औचित्‍य, संसाधनों की उपलब्‍धता हो। (PIB)  14-दिसंबर-2012 16:57 IST
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वि.कासोटिया/इंद्रपाल/रामकिशन-6111

Monday, October 8, 2012

भारतीय रेल

08-अक्टूबर-2012 16:36 IST
सुरक्षित यात्रा के लिए बहुआयामी रणनीति:कई नई योजनायें 
                                                                                                                                                    Courtesy Photo
भारतीय रेलवे सुरक्षित, तेज, स्‍वच्‍छ और आरामदायक यात्री रेलगाडि़यां प्रदान करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपना रहा है। बजट में की गई घोषणा के अनुसार 350 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से चलने वाली रेलगाडि़यां (जिन्‍हें आमतौर पर बुलेट ट्रेन कहा जाता है) चलाने की संभावनाओं का अध्‍ययन कराने के लिए सात गलियारों की पहचान की गई है। ये गलियारे सार्वजनिक निजी भागीदारी के जरिये स्‍थापित किये जाएंगे। जापान की मदद से दिल्‍ली-मुंबई मार्ग पर रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 200 किलोमीटर प्रति घंटा करने के लिए एक अध्‍ययन किया जा रहा है जिसे सेमी हाई स्‍पीड नाम दिया गया है। 

इसके साथ ही भारतीय रेलवे 130-160 किमी/घंटे की रफ्तार से इंटरसिटी यात्राओं के लिए इलेक्‍ट्रीकल मल्‍टीपल यूनिट (ईएमयू) ट्रेन सेट हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही है। ट्रेन सेट टेक्‍नोलॉजी को अपनाने की घोषणा इस वर्ष के रेल बजट में भी की गई थी। भारतीय रेलवे ने निकट भविष्‍य में ऐसी आधुनिक ईएमयू ट्रेनों के सेट डिजाइन करने का प्रस्‍ताव रखा है जब शताब्‍दी/राजधानी ट्रेनों को वर्तमान पटरियों और सिगनलिंग ढांचे पर अतिरिक्‍त खर्च किये बिना 130 किमीप्रतिघंटा/150 किमीप्रतिघंटा की रफ्तार पर चलाया जा सकेगा। राजधानी ट्रेनके मार्ग पर वर्तमान रेल पटरियां 150 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें चलाने के योग्‍य हैं लेकिन स्‍पीड को लेकर अनेक प्रतिबंधों के कारण राजधानी/शताब्‍दी की औसत रफ्तार 90 किमी. प्रति घंटा से कम है। प्रस्‍तावित आधुनिक ईएमयू ट्रेनें इन प्रतिबंधों से मुक्‍त होंगी और तेज तथा सुरक्षित आवाजाही की व्‍यवस्‍था प्रदान करेंगी। इनसे समय भी कम लगेगा। 

प्रस्‍तावित ईएमयू ट्रेन सेटों में 21 कोच हो सकते हैं। ईएमयू ट्रेन सेट ऊर्जा प्रभावोत्‍पादक, एरोडायनेमिकली डिजाइन की हुई हल्‍के वजन वाली हैं। ट्रेन को वर्तमान 130 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर बिना अतिरिक्‍त खर्च के हावड़ा और नई दिल्‍ली के बीच 2.5 से 3.0 घंटा समय कम लगेगा। आधुनिक ट्रेन सेट पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल हैं, आवाज रहित, 30 प्रतिशत कम ऊर्जा की खपत वाली हैं और इनसे पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता। ट्रेन सेट तीन चरण वाले आधुनिक आईजीबीटी टेक्‍नोलॉजी से लैस हैं और इनके रखरखाव पर बहुत कम खर्च आता है। (PIB)

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