02-मई-2013 13:50 ISTरेल राज्य मंत्री श्री अधीर रंजन चौधरी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि दिल्ली क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों सहित संपूर्ण भारतीय रेल के रेलवे स्टेशनों पर स्थापित सुरक्षा उपकरणों के सुचारू रूप से कार्य करना सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी की जाती है। यदि कोई उपकरण खराब पाया जाता है तो रेलवे के संबंधित विभाग के सहयोग से उसे ठीक कराने के लिए आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई की जाती है।
मीणा/तारा—2153
रेल स्क्रीन:रेल और रेलवे पर एक विशेष ब्लॉग... Contact:medialink32@gmail.com -WhatsApp: +91 99153 22407
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Thursday, May 2, 2013
Wednesday, March 27, 2013
रेल यात्रा के लिए संशोधित विभिन्न शुल्क
विभिन्न शुल्क और टिकट रद्द कराने का शुल्क पहली अप्रैल 2013 से लागू होगा
रेल बजट 2013-14 में रेल यात्रा के लिए संशोधित लिपिकीय शुल्कों और टिकट रद्द कराने के शुल्क को संशोधित करने के बारे में घोषणा की गई थी। संशोधित शुल्क 1 अप्रैल, 2013 से लागू होंगे। संशोधन का ब्यौरा निम्नलिखित है:-
(i) लिपिकीय शुल्क
श्रेणी
|
प्रतीक्षा सूची और आरएसी टिकट रद्द किये जाने की स्थिति लिपिकीय शुल्क (रूपये में)
| |
वर्तमान
|
संशोधित
| |
द्वितीय (अनआरक्षित )
|
10
|
15
|
द्वितीय (आरक्षित )
|
20
|
30
|
वातानुकूलित चेयर कार
|
20
|
30
|
वातानुकूलित -3 इकोनॉमी
|
20
|
30
|
वातानुकूलित -3 टियर
|
20
|
30
|
प्रथम श्रेणी
|
20
|
30
|
वातानुकूलित -2 टियर
|
20
|
30
|
वातानुकूलित प्रथम
|
20
|
30
|
एक्जीक्यूटिव
|
20
|
30
|
(ii) टिकट रद्द कराने का शुल्क:
श्रेणी
|
कनर्फमड टिकट को रद्द कराने का न्यूनतम शुल्क (रूपयों में)
| |
वर्तमान
|
संशोधित
| |
द्वितीय
|
20
|
30
|
शयनयान
|
40
|
60
|
वातानुकूलित चेयर कार
|
60
|
90
|
वातानुकूलित -3 इकोनॉमी
|
60
|
90
|
वातानुकूलित -3 टियर
|
60
|
90
|
प्रथम श्रेणी
|
60
|
100
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वातानुकूलित -2 टियर
|
60
|
100
|
वातानुकूलित प्रथम
|
70
|
120
|
एक्जीक्यूटिव
|
70
|
120
|
मीणा/विजयलक्ष्मी/सुमन–1611
Tuesday, February 26, 2013
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल के भाषण के मुख्य अंश
संसद में वर्ष 2013-14 का रेल बजट पेश करने के दौरान
चुनिंदा रेल गाडि़यों में होगी अनुभूति नाम के कोचों की शुरूआत
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने आज संसद में पेश 2013-14 के रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शताब्दी और राजधानी गाडि़यों की लोकप्रियता में वृद्धि होने से अधिक आरामदायक यात्रा की मांग भी की जा रही है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए शुरू में भारतीय रेल चुनिंदा गाडि़यों में एक ऐसे कोच की शुरूआत करेगा जिसमें उत्कृष्ट परिवेश और अत्यंत आधुनिक सुविधाओं और सेवाओं की व्यवस्था होगी। इन कोचों का नाम अनुभूति होगा तथा इनके किराए दी गई सुविधाओ कें अनुरूप होंगे।
रेल मंत्री ने रेल दुर्घटना रोकने के विभिन्न उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भले ही रेल दुर्घटनाएं कभी-कभी ही होती हों लेकिन यह बहुत चिंता की बात है। रेल दुर्घटना रोकने के कुछ प्रमुख उपाय कुछ इस प्रकार हैं:-
· पायलट आधार पर काम्प्रिहेंसिव फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम की व्यवस्था करना।
· सभी गाडि़यों के गार्ड एवं ब्रेक वैन, वातानुकूलित कोचों और पैन्ट्री कारों में पोर्टेबल अग्निशामकों की व्यवस्था करना।
· कोचों में अग्निरोधी फर्निशिंग सामग्रियों का प्रयोग बढ़ाना।
· सुरक्षा उपायों का पालन करने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाना।
· रेल सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने के लिए दस वर्षों (2014-24) के लिए सुरक्षा योजना शुरू करने का प्रस्ताव।
· रेल पटरियों पर हाथियों की दर्दनाक मौत की घटनाओं को रोकने के लिए पर्यावरण और वन्य मंत्रालय के सुझाव से विभिन्न उपाय करने का प्रस्ताव है।
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की।
· विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेल सुरक्षा बल में महिला कर्मचारियों की चार कंपनियों का गठन किया गया तथा आठ अतिरिक्त कंपनियां बनाए जाने का प्रस्ताव।
· रेल सुरक्षा बल में की जा रही भर्तियों में दस प्रतिशत रिक्तियां महिलाओं के लिए आरक्षित।
· फील्ड यूनिटों में रेल सुरक्षा बल की महिला कर्मचारियों की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी।
· महानगरों में महिला स्पेशल लोकल गाडि़यों में महिला सुरक्षाकर्मी तैनात की जा रही हैं।
· विभिन्न रेल जॉन में सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं।
· साफ-सफाई से संबद्ध सभी पहलुओं पर तुरंत ध्यान देने के लिए दस लाख से अधिक की जनसंख्या को सेवित करने वाले अथवा धार्मिक/पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को सेवित करने वाले 104 स्टेशनों की पहचान करना।
· गाडि़यों में जैविक शौचालयों की उत्तरोत्तर व्यवस्था करना।
· मशीनीकृत सफाई की सुविधाओं के साथ प्लेटफार्मों पर कंक्रीट एप्रनों की व्यवस्था करना। इसमें 200 स्टेशनों को पहले ही शामिल कर लिया गया है।
· और अधिक स्टेशनों तथा गाडि़यों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग स्कीम (ओबीएचएस) तथा क्लीन गाड़ी स्टेशनों (सीटीएस) का विस्तार।
· अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली (टीसीएएस), ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों (एटीवीएम), कॉइन-ऑपरेटिड टिकट वेंडिंग मशीन (सीओ-टीवीएम) तथा जन-साधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) का विस्तार।
· विजयवाड़ा, नागपुर, ललितपुर, बिलासपुर, जयपुर तथा अहमदाबाद में छ: और रेल नीर बॉटलिंग प्लांट की स्थापना।
· सवारी डिब्बों की सफाई तथा रियल टाइम फीडबैक देने की शीघ्र कार्रवाई के लिए एसएमएस/फोन कॉल्स/ई मेल के माध्यम से ऑन-बोर्ड कर्मचारियों के साथ यात्रियों द्वारा आसानी से संपर्क स्थापित करने के लिए चुनिंदा गाडि़यों में पायलट परियोजना की शुरूआत।
· लिनेन की साफ-सुथरी धुलाई के लिए 8-10 और मशीनीकृत लाउंड्रियों की स्थापना।
· आने वाले स्टेशनों, गाड़ी चालन स्थिति, आगमन प्लेटफॉर्म आदि के संबंध में ऑन-बोर्ड यात्रियों को सूचित करने के लिए गाडि़यों में उदघोषणा सुविधा तथा इलैक्ट्रोनिक डिस्पले बोर्डों की व्यवस्था।
· हमारे युवावर्ग तथा अन्य महत्वपूर्ण ग्राहकों की बढ़ती हुई आकांक्षाओं तथा आपश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई गाडि़यों में नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा प्रदान करना।
· पहले से चुने गए 980 स्टेशनों के अतिरिक्त 60 अन्य स्टेशनों को आदर्श स्टेशनों के रूप में अपग्रेड करना।
· रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक उपचार सेवाएं आदि उपलब्ध कराने के लिए स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लेना।
विकलांग यात्रियों की सुरक्षा
· ए-1 तथा अन्य बड़े स्टेशनों पर 179 एस्केलेटरों तथा 400 लिफटों की व्यवस्था।
· शौचालयों सहित सवारी डिब्बों के लेआउट दर्शाने वाले ब्रेल स्टीकर लगाना।
· अधिक स्टेशनों पर व्हील चेयर तथा बैटरी से चलने वाले वाहनों की व्यवस्था करना।
· सवारी डिब्बों को व्हील चेयर के अनुकूल बनाना।
· विकलांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जेटीबीएस की एक निश्चित संख्या उनके लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव।
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि रेलवे पर्यावरण का बचाव करने, निरंतर विकास करने तथा ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इस संबंध में नए उपाय किए गए हैं अथवा किए जाने का प्रस्ताव है:
· सौर तथा पवन ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी (आरईएमसी) स्थापित करना।
· 75 मैगावाट क्षमता वाला पवन चक्की संयंत्र स्थापित करना तथा सौर ऊर्जा से 1000 समपारों पर ऊर्जा की व्यवस्था करना।
· नई पीढ़ी के ऊर्जा कुशल बिजली रेल इंजनों तथा इलैक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) को लगाने के परिणामस्वरूप 2011-12 में 60 करोड़ यूनिट की बचत हुई। रेलवे ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी जीता है।
· कृषि आधारित तथा रिसाइकिल्ड पेपर का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा खानपान में प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध।
रेल मंत्री ने रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शताब्दी और राजधानी गाडि़यों की लोकप्रियता में वृद्धि होने से अधिक आरामदायक यात्रा की मांग भी की जा रही है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए शुरू में भारतीय रेल चुनिंदा गाडि़यों में एक ऐसे कोच की शुरूआत करेगा जिसमें उत्कृष्ट परिवेश और अत्यंत आधुनिक सुविधाओं और सेवाओं की व्यवस्था होगी। इन कोचों का नाम अनुभूति होगा तथा इनके किराए दी गई सुविधाओ कें अनुरूप होंगे।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे पर्यावरण का बचाव करने, निरंतर विकास करने तथा ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इस संबंध में नए उपाय किए गए हैं अथवा किए जाने का प्रस्ताव है:
· सौर तथा पवन ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी (आरईएमसी) स्थापित करना।
· 75 मैगावाट क्षमता वाला पवन चक्की संयंत्र स्थापित करना तथा सौर ऊर्जा से 1000 समपारों पर ऊर्जा की व्यवस्था करना।
· नई पीढ़ी के ऊर्जा कुशल बिजली रेल इंजनों तथा इलैक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) को लगाने के परिणामस्वरूप 2011-12 में 60 करोड़ यूनिट की बचत हुई। रेलवे ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी जीता है।
· कृषि आधारित तथा रिसाइकिल्ड पेपर का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा खानपान में प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध।
रेल मंत्री ने कहा कि इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक, हम एक अगली पीढ़ी की ई-टिकट प्रणाली आरंभ करने जा रहे हैं, जिससे सरल उपयोग, प्राप्ति समय और क्षमता से संबंधित उपयोगकर्ता के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार लाकर इंटरनेट रेल टिकट प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा। इस प्रणाली से प्रति मिनट 7200 टिकट सपोर्ट किए जा सकेंगे जबकि आज कल प्रति मिनट 2000 टिकट सपोर्ट किए जाते हैं। यह प्रणाली किसी भी समय एक साथ 1,20,000 उपयोगकर्त्ताओं को सपोर्ट करेगी तथा भविष्य में बढ़ती मांग के अनुसार इसकी क्षमता आसानी से बढ़ाई जा सकती है, जबकि वर्तमान में इसकी 40,000 उपयोगकर्त्ताओं को सपोर्ट करने की क्षमता है। इस प्रणाली में एडवांस्ड फ्रॉड कंट्रोल तथा सिक्योरिटी मैनेजमेंट टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे टिकटों के वितरण में और अधिक निष्पक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा।
श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि सरकार के राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम में अपना योगदान देने के लिए रेल मंत्रालय देशभर में 25 स्थानों पर रेल संबंधी ट्रेडों में युवाओं को दक्ष बनाएगा। ये स्थान हैं: अगरतला, अलवर, अंकलेश्वर, चंडीगढ़, देहरादून, दीमापुर, इम्फाल, जगदलपुर, जैस, कटिहार, काजीपेट, कोल्लम, कोरापुट, लमडिंग, मंगलौर, मुर्शिदाबाद, नागपुर, नजरलागुन, पठानकोट, रांची, रतलाम, शिमला, सिरसा, श्रीनगर और तिरूच्चिरापल्ली।
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि रेलवे ने खेल-कूद में सदैव उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि 2012 लंदन समर ओलंपिक में पहलवान सुशील कुमार ने लगातार दूसरे ओलंपिक में पदक जीता। श्री बंसल ने कहा कि इस वर्ष, रेलवे 9 राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं पहले ही जीत चुकी है और रेलवे खेल-कूद संवर्धन बोर्ड को ‘राष्ट्रीय खेल पुरस्कार-2012’ से सम्मानित करना वास्तव में सही है।
श्री बंसल ने कहा कि यह निर्णय लिया गया है कि राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और ध्यानचंद पुरस्कार विजेताओं को मानार्थ कार्ड पास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी जो प्रथम श्रेणी/द्वितीय श्रेणी एसी में यात्रा के लिए मान्य होगा। ओलंपिक पदक विजेताओं और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को जारी किए किए जा रहे मानार्थ कार्ड भी अर्जुन पुरस्कार विजेताओं की भांति ही राजधानी/शताब्दी गाडियों में यात्रा करने के लिए मान्य होंगे। खिलाडियों को दिए गए सभी कार्ड पास जिनसे वे राजधानी/शताब्दी गाडियों में यात्रा कर सकते हैं, उनसे अब दुरंतों गाडियों में भी यात्रा करने की अनुमति होगी।
रेल मंत्री ने कहा कि बहादुर और साहसी सैनिकों ने हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि रेल द्वारा सम्मान के संकेत के रूप में महावीर चक्र, वीर चक्र, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और पुलिस पदक के विजेता यदि अविवाहित हों तो उनके मरणोपरांत उनके माता-पिता को प्रथम श्रेणी/द्वितीय श्रेणी एसी में वैध मानार्थ कार्ड पास की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पदक विजेताओं को अब वर्ष में एक बार राजधानी/शताब्दी गाडियों में द्वितीय श्रेणी एसी में व्यक्ति के साथ यात्रा करने के लिए मानार्थ कार्ड पास दिया जाएगा।
फिलहाल स्वतंत्रता सेनानियों को प्रत्येक वर्ष अपने पास का नवीकरण कराने की आवश्यकता होती है। श्री बंसल ने बताया कि ऐसी अवस्था में उन्हें कोई परेशानी का समाना न करने पड़े इसलिए नवीकरण की इस आवश्यकता को तीन वर्ष में एक बार करने का निर्णय लिया गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि भारत की माउंटेन रेलवे, वैश्विक धरोहर स्थल हैं। यह भारत को उन देशों के उस विशिष्ट क्लब में रखती हैं जिसमें केवल स्विटज़रलैंड और ऑस्ट्रिया को जगह मिली है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है और हम इन्हें सही हालत में संरक्षित रखने के उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे खर्च में फिज़ूलखर्जी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कठोर वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी:
1) पिछले कुछ वर्षों में रेल बजट और अनुदान की पूरक मांगों के माध्यम से स्वीकृत किए गए कार्यों की धीमी प्रगति का प्रमुख कारण संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा कि इससे नियमित बजट के बजाए अतिरिक्त तौर पर असमय स्वीकृति लेने का प्रयोजन निष्फल हो जाता है। परिणामस्वरूप पिछले 25 वर्षों में पहली बार हुआ है कि रेलवे ने न तो मॉनसून सत्र में और न ही शीतकालीन सत्र में अनुदान की कोई पूरक मांग पेश की है।
2) रेलवे ने वर्ष 2011-12 में वित्त मंत्रालय से 3,000 करोड़ रूपए का विशेष ऋण लिया था जिसे चालू वित्त वर्ष में ब्याज सहित ऋण की पूरी राशि सरकार को वापस कर दी गई है।
3) पहली बार 347 चालू परियोजनाओं को प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के रूप में चिन्हित किया गया है जिसके लिए वित्तीय सहयता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इन परियोजनाओं के लिए अपेक्षित मात्रा में राशि उपलब्ध कराई जाने का इरादा किया गया है ताकि इन्हें समयबद्ध आधार पर पूरा किया जा सके।
4) व्यावहारिक और वास्तविक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समर्पित माल गलियारा सहित अंतिम चरण की परियोजनाओं और परिचालन दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए उदार वित्तीय सहायता सहित विवेकपूर्ण रणनीति अपनानी होगी।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे का फ्रेट निष्पादन परोक्ष मांग पर आधारित हैं। वर्ष के शुरू में माल लदान में अनुमान की तुलना में धीमी वृद्धि हुई है। रेलवे के पास 1025 मिलियन टन के बजाए लक्ष्य को घटाकर 1,007 मिलियन टन करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। फिर भी इसमें 2011-12 के मुकाबले 38 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज की गई है। मालभाड़ा आमदनी के लक्ष्य में भी 89,339 करोड़ रूपए के बजट अनुमान से 3,383 करोड़ रूपए की कमी करते हुए 85,976 करोड़ रूपए समायोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यात्री किराया वृद्धि का आंशिक रोल बैक का प्रभाव बाद में जनवरी 2013 में किए गए समायोजन से कुछ हद तक कम हो गया है इसलिए यात्री यातायात से प्राप्त होने वाली आमदनी का लक्ष्य 32,500 करोड़ रूपए रखने का प्रस्ताव है यानी 2012-13 के बजट अनुमान से यह 3,573 करोड़ रूपए कम है।
श्री बंसल ने कहा कि सकल यातायात प्राप्तियों को 1,25,680 करोड़ रूपए रखा गया है जबकि बजट अनुमानों में यह 1,32,552 करोड़ रूपए रखा गया था। पेंशन संबंधी लाभ और पेंशनभोगियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण पेंशन निधि में विनियोजन को 18,500 करोड़ से बढ़ाकर 20,000 करना आवश्यक होने से शुद्ध राजस्व में 6,484 करोड़ रूपए की कमी होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि वर्ष के दौरान कड़े वित्तीय अनुशासन को अपनाने के निरंतर प्रयासों से परिचालन अनुपात 88.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।
रेल मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के वर्तमान अनुमानों के साथ 2013-14 में मालभाड़ा आमदनी का लक्ष्य 9 प्रतिशत वृद्धि के साथ 93, 554 करोड़ रूपए रखा गया। यात्रियों की संख्या में 5.2 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है और इससे होने वाली आमदनी का लक्ष्य 42,210 करोड़ रूपए रखा गया है।
अन्य कोचिंग और फुटकर आय में क्रमश: 11 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि के परिणामस्वरूप सकल यातायात प्राप्तियां 1,43,742 करोड़ रूपए रहने की आशा है जो 2012-13 के संशोधित अनुमान से 18,062 करोड़ रूपए अधिक है। रेलवे की परिसंपत्तियों के नवीकरण और प्रतिस्थापन के लिए योजना संसाधनों की संभावित आवश्यकता के आधार पर मूल्यहृास आरक्षित निधि में विनियोग 7,500 करोड़ रूपए रखा गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि कोलकाता में दमदम से नौपाड़ा तक मेट्रो प्रणाली का निर्माण कार्य मार्च 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पिछले बजट में घोषित एमयूटीपी चरण-2 का कार्य भी प्रगति पर है। श्री बंसल ने बताया कि पहला वातानुकूलित ईएमयू रेक वर्ष 2013-14 में मुम्बई उपनगरीय नेटवर्क पर शुरू किया जाएगा। कोलकाता में पूर्व-पश्चिम गलियारे के चल रहे निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
श्री बंसल ने कहा कि बढ़ती हुई मांगों को पूरा करने के लिए मुम्बई में 72 अतिरिक्त सेवाएं और कोलकाता में 18 अतिरिक्त सेवाएं शुरू की जा रही हैं। इसके अलावा कोलकाता में 80 गाडियों में और चेन्नई में 30 गाडियों में डिब्बों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 की जा रही है।
रेल मंत्री ने कहा कि ईंधन के मूल्य में वृद्धि के आधार पर मालभाड़े के लिए ईंधन समायोजन घटक से संम्बद्ध संशोधन की योजना को पहली अप्रैल, 2013 से लागू किया जाएगा। जहां तक यात्री किरायों का सवाल है, चूंकि इस वर्ष जनवरी में ही किरायों में संशोधन किया गया था इसलिए मंत्रालय उनपर और बोझ नहीं डालना चाहता। रेलवे द्वारा ही 850 करोड़ रूपए के बोझ का निर्वहन किया जाएगा।
रेल मंत्री ने कहा कि रेल बजट 2013-14 के लिए 63,363 करोड़ रूपए के योजना खर्च का प्रस्ताव किया गया है। इसे 26,000 करोड़ रूपए की सकल बजटीय सहायता, रेलवे के सड़क सुरक्षा कोष में 2,000 करोड़ रूपए की हिस्सेदारी और 14,260 करोड़ के आंतरिक संसाधनों से जुटाई जाएगी। श्री बंसल ने कहा कि 15,103 करोड़ रूपए बाज़ार से उधार लेने होंगे तथा 6,000 करोड़ रूपए को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से जुटाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि माल-भाड़ा से 93,554 करोड़ रूपए की प्राप्ति होने का अनुमान है जो कि पिछले बजट वर्ष से 9 प्रतिशत अधिक है। श्री बंसल ने कहा कि बजट वर्ष में परिचालन अनुपात में 88.8 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से 87.8 प्रतिशत का सुधार होगा।
रेल मंत्री नई परियोजनाओं का प्रस्ताव किया जो इस प्रकार है-
नई लाइनें:
1. भूपदेवपुर-रायगढ़ (मंड कोलरी) (सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए)
2. गेवरा रोड-पेन्द्रा रोड (सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए)
3. जैसलमेर (थियत हमीरा)-सानू
4. केराईकल-पेरालम
5. मकरौली तक रेवाड़ी-रोहतक नई लाइन का विस्तार
6. सुल्तानपुर से कादीपुर
7. तंजावूर-पट्टूकोट्टई
मावली-बढ़ी सदड़ी खंड का आमान परिवर्तन
दोहरीकरण1. अलवर-बांदीकुई
2. चेन्नई सेंट्रल-बेसिन ब्रिज जंक्शन (पांचवी और छठी लाइन)
3. दनिया-रांची रोड4. दप्पर-चंडीगढ़5. गढ़वा रोड-रामना
6. हाजीपुर-रामदयालु7. जारगंडीह-दनिया8. पालनपुर-समख्याली (सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए)
9. रायबरेली-अमेठी10. वातवा-अहमदाबाद (तीसरी लाइन)
वि.कसोटिया/अलकेश/अंबुज/प्रदीप/प्रियंका/लक्ष्मी/तारा/सुनील/सोनिका/राजू-37 एडीएचओ-
चुनिंदा रेल गाडि़यों में होगी अनुभूति नाम के कोचों की शुरूआत
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने आज संसद में पेश 2013-14 के रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शताब्दी और राजधानी गाडि़यों की लोकप्रियता में वृद्धि होने से अधिक आरामदायक यात्रा की मांग भी की जा रही है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए शुरू में भारतीय रेल चुनिंदा गाडि़यों में एक ऐसे कोच की शुरूआत करेगा जिसमें उत्कृष्ट परिवेश और अत्यंत आधुनिक सुविधाओं और सेवाओं की व्यवस्था होगी। इन कोचों का नाम अनुभूति होगा तथा इनके किराए दी गई सुविधाओ कें अनुरूप होंगे।
रेल मंत्री ने रेल दुर्घटना रोकने के विभिन्न उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भले ही रेल दुर्घटनाएं कभी-कभी ही होती हों लेकिन यह बहुत चिंता की बात है। रेल दुर्घटना रोकने के कुछ प्रमुख उपाय कुछ इस प्रकार हैं:-
· पायलट आधार पर काम्प्रिहेंसिव फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम की व्यवस्था करना।
· सभी गाडि़यों के गार्ड एवं ब्रेक वैन, वातानुकूलित कोचों और पैन्ट्री कारों में पोर्टेबल अग्निशामकों की व्यवस्था करना।
· कोचों में अग्निरोधी फर्निशिंग सामग्रियों का प्रयोग बढ़ाना।
· सुरक्षा उपायों का पालन करने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाना।
· रेल सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने के लिए दस वर्षों (2014-24) के लिए सुरक्षा योजना शुरू करने का प्रस्ताव।
· रेल पटरियों पर हाथियों की दर्दनाक मौत की घटनाओं को रोकने के लिए पर्यावरण और वन्य मंत्रालय के सुझाव से विभिन्न उपाय करने का प्रस्ताव है।
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की।
· विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेल सुरक्षा बल में महिला कर्मचारियों की चार कंपनियों का गठन किया गया तथा आठ अतिरिक्त कंपनियां बनाए जाने का प्रस्ताव।
· रेल सुरक्षा बल में की जा रही भर्तियों में दस प्रतिशत रिक्तियां महिलाओं के लिए आरक्षित।
· फील्ड यूनिटों में रेल सुरक्षा बल की महिला कर्मचारियों की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी।
· महानगरों में महिला स्पेशल लोकल गाडि़यों में महिला सुरक्षाकर्मी तैनात की जा रही हैं।
· विभिन्न रेल जॉन में सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं।
· साफ-सफाई से संबद्ध सभी पहलुओं पर तुरंत ध्यान देने के लिए दस लाख से अधिक की जनसंख्या को सेवित करने वाले अथवा धार्मिक/पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को सेवित करने वाले 104 स्टेशनों की पहचान करना।
· गाडि़यों में जैविक शौचालयों की उत्तरोत्तर व्यवस्था करना।
· मशीनीकृत सफाई की सुविधाओं के साथ प्लेटफार्मों पर कंक्रीट एप्रनों की व्यवस्था करना। इसमें 200 स्टेशनों को पहले ही शामिल कर लिया गया है।
· और अधिक स्टेशनों तथा गाडि़यों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग स्कीम (ओबीएचएस) तथा क्लीन गाड़ी स्टेशनों (सीटीएस) का विस्तार।
· अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली (टीसीएएस), ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों (एटीवीएम), कॉइन-ऑपरेटिड टिकट वेंडिंग मशीन (सीओ-टीवीएम) तथा जन-साधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) का विस्तार।
· विजयवाड़ा, नागपुर, ललितपुर, बिलासपुर, जयपुर तथा अहमदाबाद में छ: और रेल नीर बॉटलिंग प्लांट की स्थापना।
· सवारी डिब्बों की सफाई तथा रियल टाइम फीडबैक देने की शीघ्र कार्रवाई के लिए एसएमएस/फोन कॉल्स/ई मेल के माध्यम से ऑन-बोर्ड कर्मचारियों के साथ यात्रियों द्वारा आसानी से संपर्क स्थापित करने के लिए चुनिंदा गाडि़यों में पायलट परियोजना की शुरूआत।
· लिनेन की साफ-सुथरी धुलाई के लिए 8-10 और मशीनीकृत लाउंड्रियों की स्थापना।
· आने वाले स्टेशनों, गाड़ी चालन स्थिति, आगमन प्लेटफॉर्म आदि के संबंध में ऑन-बोर्ड यात्रियों को सूचित करने के लिए गाडि़यों में उदघोषणा सुविधा तथा इलैक्ट्रोनिक डिस्पले बोर्डों की व्यवस्था।
· हमारे युवावर्ग तथा अन्य महत्वपूर्ण ग्राहकों की बढ़ती हुई आकांक्षाओं तथा आपश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई गाडि़यों में नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा प्रदान करना।
· पहले से चुने गए 980 स्टेशनों के अतिरिक्त 60 अन्य स्टेशनों को आदर्श स्टेशनों के रूप में अपग्रेड करना।
· रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक उपचार सेवाएं आदि उपलब्ध कराने के लिए स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लेना।
विकलांग यात्रियों की सुरक्षा
· ए-1 तथा अन्य बड़े स्टेशनों पर 179 एस्केलेटरों तथा 400 लिफटों की व्यवस्था।
· शौचालयों सहित सवारी डिब्बों के लेआउट दर्शाने वाले ब्रेल स्टीकर लगाना।
· अधिक स्टेशनों पर व्हील चेयर तथा बैटरी से चलने वाले वाहनों की व्यवस्था करना।
· सवारी डिब्बों को व्हील चेयर के अनुकूल बनाना।
· विकलांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जेटीबीएस की एक निश्चित संख्या उनके लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव।
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि रेलवे पर्यावरण का बचाव करने, निरंतर विकास करने तथा ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इस संबंध में नए उपाय किए गए हैं अथवा किए जाने का प्रस्ताव है:
· सौर तथा पवन ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी (आरईएमसी) स्थापित करना।
· 75 मैगावाट क्षमता वाला पवन चक्की संयंत्र स्थापित करना तथा सौर ऊर्जा से 1000 समपारों पर ऊर्जा की व्यवस्था करना।
· नई पीढ़ी के ऊर्जा कुशल बिजली रेल इंजनों तथा इलैक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) को लगाने के परिणामस्वरूप 2011-12 में 60 करोड़ यूनिट की बचत हुई। रेलवे ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी जीता है।
· कृषि आधारित तथा रिसाइकिल्ड पेपर का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा खानपान में प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध।
रेल मंत्री ने रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शताब्दी और राजधानी गाडि़यों की लोकप्रियता में वृद्धि होने से अधिक आरामदायक यात्रा की मांग भी की जा रही है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए शुरू में भारतीय रेल चुनिंदा गाडि़यों में एक ऐसे कोच की शुरूआत करेगा जिसमें उत्कृष्ट परिवेश और अत्यंत आधुनिक सुविधाओं और सेवाओं की व्यवस्था होगी। इन कोचों का नाम अनुभूति होगा तथा इनके किराए दी गई सुविधाओ कें अनुरूप होंगे।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे पर्यावरण का बचाव करने, निरंतर विकास करने तथा ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इस संबंध में नए उपाय किए गए हैं अथवा किए जाने का प्रस्ताव है:
· सौर तथा पवन ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी (आरईएमसी) स्थापित करना।
· 75 मैगावाट क्षमता वाला पवन चक्की संयंत्र स्थापित करना तथा सौर ऊर्जा से 1000 समपारों पर ऊर्जा की व्यवस्था करना।
· नई पीढ़ी के ऊर्जा कुशल बिजली रेल इंजनों तथा इलैक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) को लगाने के परिणामस्वरूप 2011-12 में 60 करोड़ यूनिट की बचत हुई। रेलवे ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी जीता है।
· कृषि आधारित तथा रिसाइकिल्ड पेपर का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा खानपान में प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध।
रेल मंत्री ने कहा कि इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक, हम एक अगली पीढ़ी की ई-टिकट प्रणाली आरंभ करने जा रहे हैं, जिससे सरल उपयोग, प्राप्ति समय और क्षमता से संबंधित उपयोगकर्ता के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार लाकर इंटरनेट रेल टिकट प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा। इस प्रणाली से प्रति मिनट 7200 टिकट सपोर्ट किए जा सकेंगे जबकि आज कल प्रति मिनट 2000 टिकट सपोर्ट किए जाते हैं। यह प्रणाली किसी भी समय एक साथ 1,20,000 उपयोगकर्त्ताओं को सपोर्ट करेगी तथा भविष्य में बढ़ती मांग के अनुसार इसकी क्षमता आसानी से बढ़ाई जा सकती है, जबकि वर्तमान में इसकी 40,000 उपयोगकर्त्ताओं को सपोर्ट करने की क्षमता है। इस प्रणाली में एडवांस्ड फ्रॉड कंट्रोल तथा सिक्योरिटी मैनेजमेंट टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे टिकटों के वितरण में और अधिक निष्पक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा।
श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि सरकार के राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम में अपना योगदान देने के लिए रेल मंत्रालय देशभर में 25 स्थानों पर रेल संबंधी ट्रेडों में युवाओं को दक्ष बनाएगा। ये स्थान हैं: अगरतला, अलवर, अंकलेश्वर, चंडीगढ़, देहरादून, दीमापुर, इम्फाल, जगदलपुर, जैस, कटिहार, काजीपेट, कोल्लम, कोरापुट, लमडिंग, मंगलौर, मुर्शिदाबाद, नागपुर, नजरलागुन, पठानकोट, रांची, रतलाम, शिमला, सिरसा, श्रीनगर और तिरूच्चिरापल्ली।
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि रेलवे ने खेल-कूद में सदैव उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि 2012 लंदन समर ओलंपिक में पहलवान सुशील कुमार ने लगातार दूसरे ओलंपिक में पदक जीता। श्री बंसल ने कहा कि इस वर्ष, रेलवे 9 राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं पहले ही जीत चुकी है और रेलवे खेल-कूद संवर्धन बोर्ड को ‘राष्ट्रीय खेल पुरस्कार-2012’ से सम्मानित करना वास्तव में सही है।
श्री बंसल ने कहा कि यह निर्णय लिया गया है कि राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और ध्यानचंद पुरस्कार विजेताओं को मानार्थ कार्ड पास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी जो प्रथम श्रेणी/द्वितीय श्रेणी एसी में यात्रा के लिए मान्य होगा। ओलंपिक पदक विजेताओं और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को जारी किए किए जा रहे मानार्थ कार्ड भी अर्जुन पुरस्कार विजेताओं की भांति ही राजधानी/शताब्दी गाडियों में यात्रा करने के लिए मान्य होंगे। खिलाडियों को दिए गए सभी कार्ड पास जिनसे वे राजधानी/शताब्दी गाडियों में यात्रा कर सकते हैं, उनसे अब दुरंतों गाडियों में भी यात्रा करने की अनुमति होगी।
रेल मंत्री ने कहा कि बहादुर और साहसी सैनिकों ने हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि रेल द्वारा सम्मान के संकेत के रूप में महावीर चक्र, वीर चक्र, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और पुलिस पदक के विजेता यदि अविवाहित हों तो उनके मरणोपरांत उनके माता-पिता को प्रथम श्रेणी/द्वितीय श्रेणी एसी में वैध मानार्थ कार्ड पास की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पदक विजेताओं को अब वर्ष में एक बार राजधानी/शताब्दी गाडियों में द्वितीय श्रेणी एसी में व्यक्ति के साथ यात्रा करने के लिए मानार्थ कार्ड पास दिया जाएगा।
फिलहाल स्वतंत्रता सेनानियों को प्रत्येक वर्ष अपने पास का नवीकरण कराने की आवश्यकता होती है। श्री बंसल ने बताया कि ऐसी अवस्था में उन्हें कोई परेशानी का समाना न करने पड़े इसलिए नवीकरण की इस आवश्यकता को तीन वर्ष में एक बार करने का निर्णय लिया गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि भारत की माउंटेन रेलवे, वैश्विक धरोहर स्थल हैं। यह भारत को उन देशों के उस विशिष्ट क्लब में रखती हैं जिसमें केवल स्विटज़रलैंड और ऑस्ट्रिया को जगह मिली है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है और हम इन्हें सही हालत में संरक्षित रखने के उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे खर्च में फिज़ूलखर्जी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कठोर वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी:
1) पिछले कुछ वर्षों में रेल बजट और अनुदान की पूरक मांगों के माध्यम से स्वीकृत किए गए कार्यों की धीमी प्रगति का प्रमुख कारण संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा कि इससे नियमित बजट के बजाए अतिरिक्त तौर पर असमय स्वीकृति लेने का प्रयोजन निष्फल हो जाता है। परिणामस्वरूप पिछले 25 वर्षों में पहली बार हुआ है कि रेलवे ने न तो मॉनसून सत्र में और न ही शीतकालीन सत्र में अनुदान की कोई पूरक मांग पेश की है।
2) रेलवे ने वर्ष 2011-12 में वित्त मंत्रालय से 3,000 करोड़ रूपए का विशेष ऋण लिया था जिसे चालू वित्त वर्ष में ब्याज सहित ऋण की पूरी राशि सरकार को वापस कर दी गई है।
3) पहली बार 347 चालू परियोजनाओं को प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के रूप में चिन्हित किया गया है जिसके लिए वित्तीय सहयता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान इन परियोजनाओं के लिए अपेक्षित मात्रा में राशि उपलब्ध कराई जाने का इरादा किया गया है ताकि इन्हें समयबद्ध आधार पर पूरा किया जा सके।
4) व्यावहारिक और वास्तविक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समर्पित माल गलियारा सहित अंतिम चरण की परियोजनाओं और परिचालन दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए उदार वित्तीय सहायता सहित विवेकपूर्ण रणनीति अपनानी होगी।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे का फ्रेट निष्पादन परोक्ष मांग पर आधारित हैं। वर्ष के शुरू में माल लदान में अनुमान की तुलना में धीमी वृद्धि हुई है। रेलवे के पास 1025 मिलियन टन के बजाए लक्ष्य को घटाकर 1,007 मिलियन टन करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। फिर भी इसमें 2011-12 के मुकाबले 38 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज की गई है। मालभाड़ा आमदनी के लक्ष्य में भी 89,339 करोड़ रूपए के बजट अनुमान से 3,383 करोड़ रूपए की कमी करते हुए 85,976 करोड़ रूपए समायोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यात्री किराया वृद्धि का आंशिक रोल बैक का प्रभाव बाद में जनवरी 2013 में किए गए समायोजन से कुछ हद तक कम हो गया है इसलिए यात्री यातायात से प्राप्त होने वाली आमदनी का लक्ष्य 32,500 करोड़ रूपए रखने का प्रस्ताव है यानी 2012-13 के बजट अनुमान से यह 3,573 करोड़ रूपए कम है।
श्री बंसल ने कहा कि सकल यातायात प्राप्तियों को 1,25,680 करोड़ रूपए रखा गया है जबकि बजट अनुमानों में यह 1,32,552 करोड़ रूपए रखा गया था। पेंशन संबंधी लाभ और पेंशनभोगियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण पेंशन निधि में विनियोजन को 18,500 करोड़ से बढ़ाकर 20,000 करना आवश्यक होने से शुद्ध राजस्व में 6,484 करोड़ रूपए की कमी होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि वर्ष के दौरान कड़े वित्तीय अनुशासन को अपनाने के निरंतर प्रयासों से परिचालन अनुपात 88.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।
रेल मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के वर्तमान अनुमानों के साथ 2013-14 में मालभाड़ा आमदनी का लक्ष्य 9 प्रतिशत वृद्धि के साथ 93, 554 करोड़ रूपए रखा गया। यात्रियों की संख्या में 5.2 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है और इससे होने वाली आमदनी का लक्ष्य 42,210 करोड़ रूपए रखा गया है।
अन्य कोचिंग और फुटकर आय में क्रमश: 11 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि के परिणामस्वरूप सकल यातायात प्राप्तियां 1,43,742 करोड़ रूपए रहने की आशा है जो 2012-13 के संशोधित अनुमान से 18,062 करोड़ रूपए अधिक है। रेलवे की परिसंपत्तियों के नवीकरण और प्रतिस्थापन के लिए योजना संसाधनों की संभावित आवश्यकता के आधार पर मूल्यहृास आरक्षित निधि में विनियोग 7,500 करोड़ रूपए रखा गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि कोलकाता में दमदम से नौपाड़ा तक मेट्रो प्रणाली का निर्माण कार्य मार्च 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पिछले बजट में घोषित एमयूटीपी चरण-2 का कार्य भी प्रगति पर है। श्री बंसल ने बताया कि पहला वातानुकूलित ईएमयू रेक वर्ष 2013-14 में मुम्बई उपनगरीय नेटवर्क पर शुरू किया जाएगा। कोलकाता में पूर्व-पश्चिम गलियारे के चल रहे निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
श्री बंसल ने कहा कि बढ़ती हुई मांगों को पूरा करने के लिए मुम्बई में 72 अतिरिक्त सेवाएं और कोलकाता में 18 अतिरिक्त सेवाएं शुरू की जा रही हैं। इसके अलावा कोलकाता में 80 गाडियों में और चेन्नई में 30 गाडियों में डिब्बों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 की जा रही है।
रेल मंत्री ने कहा कि ईंधन के मूल्य में वृद्धि के आधार पर मालभाड़े के लिए ईंधन समायोजन घटक से संम्बद्ध संशोधन की योजना को पहली अप्रैल, 2013 से लागू किया जाएगा। जहां तक यात्री किरायों का सवाल है, चूंकि इस वर्ष जनवरी में ही किरायों में संशोधन किया गया था इसलिए मंत्रालय उनपर और बोझ नहीं डालना चाहता। रेलवे द्वारा ही 850 करोड़ रूपए के बोझ का निर्वहन किया जाएगा।
रेल मंत्री ने कहा कि रेल बजट 2013-14 के लिए 63,363 करोड़ रूपए के योजना खर्च का प्रस्ताव किया गया है। इसे 26,000 करोड़ रूपए की सकल बजटीय सहायता, रेलवे के सड़क सुरक्षा कोष में 2,000 करोड़ रूपए की हिस्सेदारी और 14,260 करोड़ के आंतरिक संसाधनों से जुटाई जाएगी। श्री बंसल ने कहा कि 15,103 करोड़ रूपए बाज़ार से उधार लेने होंगे तथा 6,000 करोड़ रूपए को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से जुटाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि माल-भाड़ा से 93,554 करोड़ रूपए की प्राप्ति होने का अनुमान है जो कि पिछले बजट वर्ष से 9 प्रतिशत अधिक है। श्री बंसल ने कहा कि बजट वर्ष में परिचालन अनुपात में 88.8 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से 87.8 प्रतिशत का सुधार होगा।
रेल मंत्री नई परियोजनाओं का प्रस्ताव किया जो इस प्रकार है-
नई लाइनें:
1. भूपदेवपुर-रायगढ़ (मंड कोलरी) (सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए)
2. गेवरा रोड-पेन्द्रा रोड (सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए)
3. जैसलमेर (थियत हमीरा)-सानू
4. केराईकल-पेरालम
5. मकरौली तक रेवाड़ी-रोहतक नई लाइन का विस्तार
6. सुल्तानपुर से कादीपुर
7. तंजावूर-पट्टूकोट्टई
मावली-बढ़ी सदड़ी खंड का आमान परिवर्तन
दोहरीकरण1. अलवर-बांदीकुई
2. चेन्नई सेंट्रल-बेसिन ब्रिज जंक्शन (पांचवी और छठी लाइन)
3. दनिया-रांची रोड4. दप्पर-चंडीगढ़5. गढ़वा रोड-रामना
6. हाजीपुर-रामदयालु7. जारगंडीह-दनिया8. पालनपुर-समख्याली (सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए)
9. रायबरेली-अमेठी10. वातवा-अहमदाबाद (तीसरी लाइन)
वि.कसोटिया/अलकेश/अंबुज/प्रदीप/प्रियंका/लक्ष्मी/तारा/सुनील/सोनिका/राजू-37 एडीएचओ-
यात्रियों की सुरक्षा के उपाय
रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने आज संसद में पेश 2013-14 के रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की।
· विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेल सुरक्षा बल में महिला कर्मचारियों की चार कंपनियों का गठन किया गया तथा आठ अतिरिक्त कंपनियां बनाए जाने का प्रस्ताव।
· रेल सुरक्षा बल में की जा रही भर्तियों में दस प्रतिशत रिक्तियां महिलाओं के लिए आरक्षित।
· फील्ड यूनिटों में रेल सुरक्षा बल की महिला कर्मचारियों की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी।
· महानगरों में महिला स्पेशल लोकल गाडि़यों में महिला सुरक्षाकर्मी तैनात की जा रही हैं।
· विभिन्न रेल जॉन में सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं।
· साफ-सफाई से संबद्ध सभी पहलुओं पर तुरंत ध्यान देने के लिए दस लाख से अधिक की जनसंख्या को सेवित करने वाले अथवा धार्मिक/पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को सेवित करने वाले 104 स्टेशनों की पहचान करना।
· गाडि़यों में जैविक शौचालयों की उत्तरोत्तर व्यवस्था करना।
· मशीनीकृत सफाई की सुविधाओं के साथ प्लेटफार्मों पर कंक्रीट एप्रनों की व्यवस्था करना। इसमें 200 स्टेशनों को पहले ही शामिल कर लिया गया है।
· और अधिक स्टेशनों तथा गाडि़यों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग स्कीम (ओबीएचएस) तथा क्लीन गाड़ी स्टेशनों (सीटीएस) का विस्तार।
· अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली (टीसीएएस), ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों (एटीवीएम), कॉइन-ऑपरेटिड टिकट वेंडिंग मशीन (सीओ-टीवीएम) तथा जन-साधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) का विस्तार।
· विजयवाड़ा, नागपुर, ललितपुर, बिलासपुर, जयपुर तथा अहमदाबाद में छ: और रेल नीर बॉटलिंग प्लांट की स्थापना।
· सवारी डिब्बों की सफाई तथा रियल टाइम फीडबैक देने की शीघ्र कार्रवाई के लिए एसएमएस/फोन कॉल्स/ई मेल के माध्यम से ऑन-बोर्ड कर्मचारियों के साथ यात्रियों द्वारा आसानी से संपर्क स्थापित करने के लिए चुनिंदा गाडि़यों में पायलट परियोजना की शुरूआत।
· लिनेन की साफ-सुथरी धुलाई के लिए 8-10 और मशीनीकृत लाउंड्रियों की स्थापना।
· आने वाले स्टेशनों, गाड़ी चालन स्थिति, आगमन प्लेटफॉर्म आदि के संबंध में ऑन-बोर्ड यात्रियों को सूचित करने के लिए गाडि़यों में उदघोषणा सुविधा तथा इलैक्ट्रोनिक डिस्पले बोर्डों की व्यवस्था।
· हमारे युवावर्ग तथा अन्य महत्वपूर्ण ग्राहकों की बढ़ती हुई आकांक्षाओं तथा आपश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई गाडि़यों में नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा प्रदान करना।
· पहले से चुने गए 980 स्टेशनों के अतिरिक्त 60 अन्य स्टेशनों को आदर्श स्टेशनों के रूप में अपग्रेड करना।
· रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक उपचार सेवाएं आदि उपलब्ध कराने के लिए स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लेना।
विकलांग यात्रियों की सुरक्षा
· ए-1 तथा अन्य बड़े स्टेशनों पर 179 एस्केलेटरों तथा 400 लिफटों की व्यवस्था।
· शौचालयों सहित सवारी डिब्बों के लेआउट दर्शाने वाले ब्रेल स्टीकर लगाना।
· अधिक स्टेशनों पर व्हील चेयर तथा बैटरी से चलने वाले वाहनों की व्यवस्था करना।
· सवारी डिब्बों को व्हील चेयर के अनुकूल बनाना।
· विकलांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जेटीबीएस की एक निश्चित संख्या उनके लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव। (PIB)
वि.कसोटिया/अलकेश/अंबुज/प्रदीप/प्रियंका/लक्ष्मी/तारा/सुनील/सोनिका/राजू-16 एडीएचओ-
रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने आज संसद में पेश 2013-14 के रेल बजट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की।
· विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेल सुरक्षा बल में महिला कर्मचारियों की चार कंपनियों का गठन किया गया तथा आठ अतिरिक्त कंपनियां बनाए जाने का प्रस्ताव।
· रेल सुरक्षा बल में की जा रही भर्तियों में दस प्रतिशत रिक्तियां महिलाओं के लिए आरक्षित।
· फील्ड यूनिटों में रेल सुरक्षा बल की महिला कर्मचारियों की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी।
· महानगरों में महिला स्पेशल लोकल गाडि़यों में महिला सुरक्षाकर्मी तैनात की जा रही हैं।
· विभिन्न रेल जॉन में सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं।
· साफ-सफाई से संबद्ध सभी पहलुओं पर तुरंत ध्यान देने के लिए दस लाख से अधिक की जनसंख्या को सेवित करने वाले अथवा धार्मिक/पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को सेवित करने वाले 104 स्टेशनों की पहचान करना।
· गाडि़यों में जैविक शौचालयों की उत्तरोत्तर व्यवस्था करना।
· मशीनीकृत सफाई की सुविधाओं के साथ प्लेटफार्मों पर कंक्रीट एप्रनों की व्यवस्था करना। इसमें 200 स्टेशनों को पहले ही शामिल कर लिया गया है।
· और अधिक स्टेशनों तथा गाडि़यों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग स्कीम (ओबीएचएस) तथा क्लीन गाड़ी स्टेशनों (सीटीएस) का विस्तार।
· अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली (टीसीएएस), ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनों (एटीवीएम), कॉइन-ऑपरेटिड टिकट वेंडिंग मशीन (सीओ-टीवीएम) तथा जन-साधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) का विस्तार।
· विजयवाड़ा, नागपुर, ललितपुर, बिलासपुर, जयपुर तथा अहमदाबाद में छ: और रेल नीर बॉटलिंग प्लांट की स्थापना।
· सवारी डिब्बों की सफाई तथा रियल टाइम फीडबैक देने की शीघ्र कार्रवाई के लिए एसएमएस/फोन कॉल्स/ई मेल के माध्यम से ऑन-बोर्ड कर्मचारियों के साथ यात्रियों द्वारा आसानी से संपर्क स्थापित करने के लिए चुनिंदा गाडि़यों में पायलट परियोजना की शुरूआत।
· लिनेन की साफ-सुथरी धुलाई के लिए 8-10 और मशीनीकृत लाउंड्रियों की स्थापना।
· आने वाले स्टेशनों, गाड़ी चालन स्थिति, आगमन प्लेटफॉर्म आदि के संबंध में ऑन-बोर्ड यात्रियों को सूचित करने के लिए गाडि़यों में उदघोषणा सुविधा तथा इलैक्ट्रोनिक डिस्पले बोर्डों की व्यवस्था।
· हमारे युवावर्ग तथा अन्य महत्वपूर्ण ग्राहकों की बढ़ती हुई आकांक्षाओं तथा आपश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई गाडि़यों में नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा प्रदान करना।
· पहले से चुने गए 980 स्टेशनों के अतिरिक्त 60 अन्य स्टेशनों को आदर्श स्टेशनों के रूप में अपग्रेड करना।
· रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक उपचार सेवाएं आदि उपलब्ध कराने के लिए स्वैच्छिक संगठनों का सहयोग लेना।
विकलांग यात्रियों की सुरक्षा
· ए-1 तथा अन्य बड़े स्टेशनों पर 179 एस्केलेटरों तथा 400 लिफटों की व्यवस्था।
· शौचालयों सहित सवारी डिब्बों के लेआउट दर्शाने वाले ब्रेल स्टीकर लगाना।
· अधिक स्टेशनों पर व्हील चेयर तथा बैटरी से चलने वाले वाहनों की व्यवस्था करना।
· सवारी डिब्बों को व्हील चेयर के अनुकूल बनाना।
· विकलांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जेटीबीएस की एक निश्चित संख्या उनके लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव। (PIB)
वि.कसोटिया/अलकेश/अंबुज/प्रदीप/प्रियंका/लक्ष्मी/तारा/सुनील/सोनिका/राजू-16 एडीएचओ-
Thursday, February 7, 2013
रूसी रेलवे विभाग का प्रतिनिधिमंडल लीबिया जाएगा
सबसे पहले वहाँ बड़े पैमाने पर बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा
रूसी रेलवे विभाग का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही लीबिया की यात्रा करने वाला है जो सिरते -बेनगाज़ी रेलवे लाइन के निर्माण की परियोजना के भाग्य का फैसला करने के लिए इस देश के अधिकारियों के साथ बातचीत करेगा। रूस के रेलवे मंत्री व्लादिमीर याकूनिन ने कहा कि रूसी रेलवे के अधिकारी लीबिया के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे कि क्या इस परियोजना को जारी रखना है या फिर इसे बंद कर देना होगा। उन्होंने कहा कि अगर इस परियोजना के तहत काम जारी रखना होगा तो सबसे पहले वहाँ बड़े पैमाने पर बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा। {रेडियो रूस से साभार} (6.02.2013, 02:53)
रूसी रेलवे विभाग का प्रतिनिधिमंडल लीबिया जाएगा
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| फ़ोटोः रिया नोवस्ती |
रूसी रेलवे विभाग का प्रतिनिधिमंडल लीबिया जाएगा
Wednesday, January 30, 2013
वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों का विकास
30-जनवरी-2013 12:58 IST
1975 में की गई थी भारत में डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत
विशेष लेख रेल एच सी कुंवर*
भारत में डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत 1975 में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य कम दूरी की यात्री गाडियों में ज्यादा यात्रियों को ढोना था। भारतीय रेल के इस प्राथमिक लक्ष्य को तो प्राप्त कर लिया गया लेकिन ये गैर वातानुकूलित ट्रेन यात्रियों के बीच बहुत अधिक पसंद नहीं की गई। इसका प्रमुख कारण निचले स्तर से धुएं का प्रवेश और प्लेटफार्म स्तर की ऊँचाई पर बाहर के दृश्यों का न दिख पाना था। इस कारण भारतीय रेल में गैर वातानुकूलित ट्रेनों के विकास को और अधिक अनुकरित नहीं किया गया।
अपने लंबे अनुभवों के साथ भारतीय रेल ने फिर एक बार डबल डेकर ट्रेनों को प्रारंभ् करने की योजना बनाई जिसमें गैर वातानुकूलित डब्बों में आ रही समस्याओं को वातानुकूलित रूप में दूर किया जा सके। रेल मंत्री ने वर्ष 2009 के रेल बजट में वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत की घोषणा की।
मौजूदा स्थाई ढांचों जैसे रोड ओवर ब्रिज, फुट ओवर ब्रिज और बिजली की लाइनों आदि को ध्यान में रखते हुए बिना ऊँचाई बढाये डबल डेकर ट्रेनों का विकास करना एक बडी चुनौती थी। इसके साथ ही वातानुकूलित उपकरणों और एयर डक्ट को भी उपलब्ध जगह में ही समाने की समस्या थी।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेल के डिजाईन इंजीनियरों ने प्रत्येक कोच में और ज्यादा कोच और पूर्णता घरेलू स्तर पर ही इसके विकास की प्रक्रिया शुरू करी। उनकी कार्यकुशलता तब साबित हुई जब भारतीय रेल की एक उत्पादन ईकाई रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने सिर्फ 9 महीने के रिकार्ड समय में पहला प्रोटो टाईप वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन को तैयार कर लिया। सभी आवश्यक परीक्षणों को पूर्ण करने के बाद अक्तूबर 2011 में हावडा और धनबाद के बीच पहली वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन की शुरूआत की गई।
इस ट्रेन के एक उन्नत संस्करण का विकास कर जयपुर और दिल्ली तथा अहमदाबाद और मुम्बई के बीच इसकी सेवाएं प्रारंभ की गई। निकट भविष्य में हबीब गंज-इंदौर और चैन्नई-बंगलौर के बीच भी ऐसी सेवा प्रारंभ करने की योजना है। यात्रियों के अनुकूल डिजाईन के साथ वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन प्रत्येक कोच में 120 यात्रियों को ले जा सकती है जो शताब्दी चेयर कार के 78 यात्रियों से तुलना करने पर 50 फीसदी अधिक है। अपने कम किराये के कारण वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों ने वातानुकूलित सफर का आनंद कई इच्छुक यात्रियों को दिलाने में सफल रही हैं और इस कारण यात्रियों के बीच बेहद पसंद की जा रही है।
इन नई वातानुकूलित डिब्बों में कई तकनीकी खूबियां जैसे हल्के वज़न वाली स्टेनलेस स्टील बॉडी और आंखों को मोहने वाली भीतरी साज सज्जा हैं। एयर स्प्रिंग के साथ यूरो फिल्मा डिजाईन के डिब्बे से यात्रियों को सफर में बेहतर आराम मिलता है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के ऊपर न चढने वाले और दुर्घटना की स्थिति में इसको वहन करने वाले डिब्बे भी प्रदान किये गये हैं। इन डिजाईन के कारण प्रति यात्री ट्रेन पर कम भार पडता है जिससे वो उच्च ऊर्जा क्षमता वाले बन गये हैं।
दो डिब्बों के बीच की दीवारों के स्थान का अधिकतम इस्तेमाल कर दोनों स्तरों के लिए स्थान का प्रबंध किया गया है। जिससे डिब्बों की कुल ऊँचाई सिर्फ 4.5 इंच बढी है। इन डिब्बों के विकास प्रक्रिया के दौरान नवीनतम डिजाईन सॉफ्टवेयरों का प्रयोग किया गया और वास्तविक उत्पादन शुरू करने से पहले प्रोटो टाइपिंग कर इसकी जांच की गई।
वातानुकूलित डबल डेकर डिब्बों के सफल विकास से भारतीय रेल ने तकनीकी विकास में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इससे रेलवे ने तीव्र गति से बढ रहे देश की आशाओं को परिपूर्ण करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।(PIB) (पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)
******
* उप-निदेशक (मीडिया एवं दूरसंचार), रेल मंत्रालय
मीणा/जुयाल/चन्द्रकला – 30
एचडीएचओ –
1975 में की गई थी भारत में डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत
विशेष लेख रेल एच सी कुंवर*
भारत में डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत 1975 में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य कम दूरी की यात्री गाडियों में ज्यादा यात्रियों को ढोना था। भारतीय रेल के इस प्राथमिक लक्ष्य को तो प्राप्त कर लिया गया लेकिन ये गैर वातानुकूलित ट्रेन यात्रियों के बीच बहुत अधिक पसंद नहीं की गई। इसका प्रमुख कारण निचले स्तर से धुएं का प्रवेश और प्लेटफार्म स्तर की ऊँचाई पर बाहर के दृश्यों का न दिख पाना था। इस कारण भारतीय रेल में गैर वातानुकूलित ट्रेनों के विकास को और अधिक अनुकरित नहीं किया गया।
अपने लंबे अनुभवों के साथ भारतीय रेल ने फिर एक बार डबल डेकर ट्रेनों को प्रारंभ् करने की योजना बनाई जिसमें गैर वातानुकूलित डब्बों में आ रही समस्याओं को वातानुकूलित रूप में दूर किया जा सके। रेल मंत्री ने वर्ष 2009 के रेल बजट में वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों की शुरूआत की घोषणा की।
मौजूदा स्थाई ढांचों जैसे रोड ओवर ब्रिज, फुट ओवर ब्रिज और बिजली की लाइनों आदि को ध्यान में रखते हुए बिना ऊँचाई बढाये डबल डेकर ट्रेनों का विकास करना एक बडी चुनौती थी। इसके साथ ही वातानुकूलित उपकरणों और एयर डक्ट को भी उपलब्ध जगह में ही समाने की समस्या थी।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेल के डिजाईन इंजीनियरों ने प्रत्येक कोच में और ज्यादा कोच और पूर्णता घरेलू स्तर पर ही इसके विकास की प्रक्रिया शुरू करी। उनकी कार्यकुशलता तब साबित हुई जब भारतीय रेल की एक उत्पादन ईकाई रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने सिर्फ 9 महीने के रिकार्ड समय में पहला प्रोटो टाईप वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन को तैयार कर लिया। सभी आवश्यक परीक्षणों को पूर्ण करने के बाद अक्तूबर 2011 में हावडा और धनबाद के बीच पहली वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन की शुरूआत की गई।
इस ट्रेन के एक उन्नत संस्करण का विकास कर जयपुर और दिल्ली तथा अहमदाबाद और मुम्बई के बीच इसकी सेवाएं प्रारंभ की गई। निकट भविष्य में हबीब गंज-इंदौर और चैन्नई-बंगलौर के बीच भी ऐसी सेवा प्रारंभ करने की योजना है। यात्रियों के अनुकूल डिजाईन के साथ वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेन प्रत्येक कोच में 120 यात्रियों को ले जा सकती है जो शताब्दी चेयर कार के 78 यात्रियों से तुलना करने पर 50 फीसदी अधिक है। अपने कम किराये के कारण वातानुकूलित डबल डेकर ट्रेनों ने वातानुकूलित सफर का आनंद कई इच्छुक यात्रियों को दिलाने में सफल रही हैं और इस कारण यात्रियों के बीच बेहद पसंद की जा रही है।
इन नई वातानुकूलित डिब्बों में कई तकनीकी खूबियां जैसे हल्के वज़न वाली स्टेनलेस स्टील बॉडी और आंखों को मोहने वाली भीतरी साज सज्जा हैं। एयर स्प्रिंग के साथ यूरो फिल्मा डिजाईन के डिब्बे से यात्रियों को सफर में बेहतर आराम मिलता है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के ऊपर न चढने वाले और दुर्घटना की स्थिति में इसको वहन करने वाले डिब्बे भी प्रदान किये गये हैं। इन डिजाईन के कारण प्रति यात्री ट्रेन पर कम भार पडता है जिससे वो उच्च ऊर्जा क्षमता वाले बन गये हैं।
दो डिब्बों के बीच की दीवारों के स्थान का अधिकतम इस्तेमाल कर दोनों स्तरों के लिए स्थान का प्रबंध किया गया है। जिससे डिब्बों की कुल ऊँचाई सिर्फ 4.5 इंच बढी है। इन डिब्बों के विकास प्रक्रिया के दौरान नवीनतम डिजाईन सॉफ्टवेयरों का प्रयोग किया गया और वास्तविक उत्पादन शुरू करने से पहले प्रोटो टाइपिंग कर इसकी जांच की गई।
वातानुकूलित डबल डेकर डिब्बों के सफल विकास से भारतीय रेल ने तकनीकी विकास में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इससे रेलवे ने तीव्र गति से बढ रहे देश की आशाओं को परिपूर्ण करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।(PIB) (पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)
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* उप-निदेशक (मीडिया एवं दूरसंचार), रेल मंत्रालय
मीणा/जुयाल/चन्द्रकला – 30
एचडीएचओ –
Thursday, January 24, 2013
खानपान संबंधित शिकायत ?
24-जनवरी-2013 13:03 IST
रेलवे ने शुरू किया टोल फ्री हेल्प लाइन नम्बर 1800-111-321
रेल मंत्रालय ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए खानपान संबंधित शिकायतें जैसे भोजन की गुणवत्ता, अधिक दाम लेना इत्यादि को दर्ज करने के लिए टोल फ्री नम्बर 1800-111-321 के साथ केन्द्रीय निगरानी कक्ष की स्थापना की है। इस बात की घोषणा करते हुए रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि यह सुविधा सभी सातों दिन सुबह 7 बजे से रात्रि दस बजे तक उपलब्ध रहेगी, जब सामान्यत: यात्रियों को भोजन परोसा जाता है। मंत्री महोदय ने कहा कि जैसे ही शिकायत दर्ज होगी, शिकायतकर्ता के शिकायती पते को आधार बनाकर समय पर हरसंभव कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सुविधा ने काम करना शुरू कर दिया है। (PIB)***
मीणा/शोभा/गीता- 301
रेलवे ने शुरू किया टोल फ्री हेल्प लाइन नम्बर 1800-111-321
रेल मंत्रालय ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए खानपान संबंधित शिकायतें जैसे भोजन की गुणवत्ता, अधिक दाम लेना इत्यादि को दर्ज करने के लिए टोल फ्री नम्बर 1800-111-321 के साथ केन्द्रीय निगरानी कक्ष की स्थापना की है। इस बात की घोषणा करते हुए रेल मंत्री श्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि यह सुविधा सभी सातों दिन सुबह 7 बजे से रात्रि दस बजे तक उपलब्ध रहेगी, जब सामान्यत: यात्रियों को भोजन परोसा जाता है। मंत्री महोदय ने कहा कि जैसे ही शिकायत दर्ज होगी, शिकायतकर्ता के शिकायती पते को आधार बनाकर समय पर हरसंभव कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सुविधा ने काम करना शुरू कर दिया है। (PIB)***
मीणा/शोभा/गीता- 301
Wednesday, December 19, 2012
रेलयात्रा के लिए पहचान-पत्र बना अनिवार्य
विशेष लेख:रेलवे - दिलीप कुमार
भारतीय रेल देष के नागरिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। विशाल नेटवर्क एवं आरामदेह यात्रा समुचित दर पर सुलभ कराने के अपने गुण के कारण रेलवे को लोग देश की जीवन-रेखा भी मानते रहे हैं। यात्रियों को सुविधा प्रदान करने के लिए रेलवे द्वारा लगभग आठ हजार नियमित गाडि़यों के अलावा समय-समय पर विशेष गाडि़यों का परिचालन भी किया जाता रहा है। वस्तुतः रेलवे मुस्कान के साथ यात्रियों की सेवा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहा है । लेकिन कई बार खास अवसरों पर रेलगाडि़यों में भीड़ काफी बढ़ जाती है। ऐसे अवसरों पर टिकटों की कालाबाजारी की बातें भी सामने आती रहती हैं। रेलवे ने अपनी टिकटिंग प्रणाली को कालाबाजारों और दलालों से मुक्त रखने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इन प्रयासों में रेल यात्रा के दौरान परिचय-पत्र को अनिवार्य बनाना सबसे विषिष्ट प्रयास रहा है।
रेलवे द्वारा सबसे पहले ई-टिकट में परिचय पत्र को अनिवार्य किया गया था। उसके बाद रेलवे ने दिनांक 16.01.2012 को जारी रेलवे बोर्ड के परिपत्र सं0 04/2012 द्वारा 15.02.2012 से सभी वातानुकूलित श्रेणी में सामान्य एवं इंटरनेट से आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को अपने साथ परिचय पत्र रखना अनिवार्य कर दिया गया। इसके लिए रेलवे ने अपने साफ्टवेयर में बदलाव लाया और टिकटों पर पहचान-पत्र संख्या का मुद्रण प्रारंभ किया गया। प्रारंभ में व्यवस्था थी कि एक से अधिक यात्रियों वाले आरक्षित टिकट पर किसी एक यात्री के परिचय पत्र का नंबर दर्ज होगा और उस परिचय पत्र वाले यात्री के यात्रा करने पर ही अन्य यात्रियों का टिकट वैध माना जायेगा। बाद में इस व्यवस्था में बदलाव लाते हुए आरक्षित टिकट पर दो यात्रियों के परिचय पत्र संख्या मुद्रित करने का प्रावधान किया गया ताकि किसी कारणवश यदि एक यात्री अपनी यात्रा रद्द कर देते हैं तो टिकट के दूसरे यात्री के परिचय-पत्र का मिलान एवं जांच करके पूरे दल को यात्रा की अनुमति दी जा सके। उस समय यात्री आरक्षण प्रणाली और इंटरनेट से लिये गये सभी वातानुकूलित वर्ग जिसमें तृतीय वातानुकूलित श्रेणी, द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी, प्रथम वातानुकूलित श्रेणी, एसी चेयर कार और एक्सक्यूटिव क्लास शामिल है में यात्रा करने के लिए रेलवे द्वारा स्वीकृत नौ पहचान पत्रों में से किसी एक पहचान पत्र का यात्री के साथ होना अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन कई लोगों ने इस आधार पर कि रेलवे के आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले करीब 80 फीसदी यात्री स्लीपर क्लास में यात्रा करते हैं, इसलिए सिर्फ वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र को अनिवार्य करने से टिकटों की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगेगी। बल्कि स्लीपर क्लास में भी परिचय पत्र की अनिवार्यता आवश्यक है। वस्तुतः रेलवे द्वारा फरवरी में लागू की गई व्यवस्था को पहले कदम के रूप में देखा जाना चाहिए था। क्योंकि भारत जैसे विषाल देष में किसी भी योजना को व्यापक पैमाने पर लागू करने से पहले उसे छोटे स्तर पर लागू करके उसके परिणाम को देख लेना जरूरी होता है। देशवासियों ने वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र की अनिवार्यता वाली व्यवस्था का तहेदिल से स्वागत किया था। प्रारंभ में इससे कुछ यात्रियों को परेशानी भी हुई थी लेकिन बाद में सभी ने माना कि परिचय पत्र की अनिवार्यता न सिर्फ टिकटों की कालाबाजारी को रोकने के लिए आवश्यक है अपितु इस व्यवस्था से सुरक्षित रेल यात्रा में भी मदद मिलती है। मीडिया द्वारा भी वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र की अनिवार्यता संबंधी रेलवे के नियमों की प्रशंसा की गई थी।
भारतीय रेल ने वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र के अनिवार्यता की सफलता के बाद 01 नंवबर 2012 को जारी वाणिज्य परिपत्र सं0 68 द्वारा 01 दिसंबर 2012 के प्रभाव से रेलवे के किसी भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने के लिए भारतीय रेल से मान्यता प्राप्त 10 पहचान पत्रों में से किसी 01 पहचान पत्र का यात्रा के दौरान यात्री के पास होना अनिवार्य कर दिया गया है। यह पहचान यात्रा टिकट पर बुक किये गये यात्रियों में से किसी एक के पास अवश्य ही होनी चाहिए । हालांकि तत्काल योजना के तहत टिकट लेने वाले यात्रियों के पास वही पहचान पत्र होनी चाहिए जिसका उल्लेख टिकट खरीदते समय उनके द्वारा किया गया हो और जिसका नंबर टिकट पर अंकित हो । भारतीय रेल ने फिलहाल जिन 10 पहचान पत्रों को मान्यता प्रदान की है, वे इस प्रकार हैं:-
1. निर्वाचन आयोग भारत सरकार द्वारा जारी मतदाता पहचान-पत्र,
2. आयकर विभाग द्वारा निर्गत पैन कार्ड,
3. पासपोर्ट,
4. आर.टी.ओ. द्वारा निर्गत ड्राइविंग लाइसेंस,
5. भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा निर्गत सीरियल नंबर युक्त फोटो पहचान-पत्र,
6. मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज, जिसका वह छात्र है द्वारा निर्गत फोटो पहचानपत्र,
7. राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा निर्गत फोटो सहित पासबुक,
8. बैंकों द्वारा निर्गत फोटोयुक्त लेमिनेटेड क्रेडिट कार्ड
9. यूनिक पहचान पत्र ‘आधार’
10. केन्द्र/राज्य सरकार के पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, जिला प्रशासन, नगरपालिका संगठन और पंचायत प्रशासन द्वारा जारी फोटोयुक्त पहचान पत्र, जिसमें सीरियल नंबर हो ।
रेलवे ने यात्रियो को यात्रा के दौरान फोटो पहचान पत्र की अनिवार्यता बताने के लिए अपने स्तर पर प्रयास चालू कर दिया है। टिकट चेकिंग कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि इस प्रावधान को पूरी तरह से लागू करें। वस्तुतः यह प्रावधान जनहित में है और सभी को इसे लागू करने में सहयोग करना चाहिए। (PIB) 19-दिसंबर-2012 15:18 IST
*इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं।
मीणा/सुमन-299
पूरी सूची.19.12.2012
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| Courtesy Photo:Desi Edition |
रेलवे द्वारा सबसे पहले ई-टिकट में परिचय पत्र को अनिवार्य किया गया था। उसके बाद रेलवे ने दिनांक 16.01.2012 को जारी रेलवे बोर्ड के परिपत्र सं0 04/2012 द्वारा 15.02.2012 से सभी वातानुकूलित श्रेणी में सामान्य एवं इंटरनेट से आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को अपने साथ परिचय पत्र रखना अनिवार्य कर दिया गया। इसके लिए रेलवे ने अपने साफ्टवेयर में बदलाव लाया और टिकटों पर पहचान-पत्र संख्या का मुद्रण प्रारंभ किया गया। प्रारंभ में व्यवस्था थी कि एक से अधिक यात्रियों वाले आरक्षित टिकट पर किसी एक यात्री के परिचय पत्र का नंबर दर्ज होगा और उस परिचय पत्र वाले यात्री के यात्रा करने पर ही अन्य यात्रियों का टिकट वैध माना जायेगा। बाद में इस व्यवस्था में बदलाव लाते हुए आरक्षित टिकट पर दो यात्रियों के परिचय पत्र संख्या मुद्रित करने का प्रावधान किया गया ताकि किसी कारणवश यदि एक यात्री अपनी यात्रा रद्द कर देते हैं तो टिकट के दूसरे यात्री के परिचय-पत्र का मिलान एवं जांच करके पूरे दल को यात्रा की अनुमति दी जा सके। उस समय यात्री आरक्षण प्रणाली और इंटरनेट से लिये गये सभी वातानुकूलित वर्ग जिसमें तृतीय वातानुकूलित श्रेणी, द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी, प्रथम वातानुकूलित श्रेणी, एसी चेयर कार और एक्सक्यूटिव क्लास शामिल है में यात्रा करने के लिए रेलवे द्वारा स्वीकृत नौ पहचान पत्रों में से किसी एक पहचान पत्र का यात्री के साथ होना अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन कई लोगों ने इस आधार पर कि रेलवे के आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने वाले करीब 80 फीसदी यात्री स्लीपर क्लास में यात्रा करते हैं, इसलिए सिर्फ वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र को अनिवार्य करने से टिकटों की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगेगी। बल्कि स्लीपर क्लास में भी परिचय पत्र की अनिवार्यता आवश्यक है। वस्तुतः रेलवे द्वारा फरवरी में लागू की गई व्यवस्था को पहले कदम के रूप में देखा जाना चाहिए था। क्योंकि भारत जैसे विषाल देष में किसी भी योजना को व्यापक पैमाने पर लागू करने से पहले उसे छोटे स्तर पर लागू करके उसके परिणाम को देख लेना जरूरी होता है। देशवासियों ने वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र की अनिवार्यता वाली व्यवस्था का तहेदिल से स्वागत किया था। प्रारंभ में इससे कुछ यात्रियों को परेशानी भी हुई थी लेकिन बाद में सभी ने माना कि परिचय पत्र की अनिवार्यता न सिर्फ टिकटों की कालाबाजारी को रोकने के लिए आवश्यक है अपितु इस व्यवस्था से सुरक्षित रेल यात्रा में भी मदद मिलती है। मीडिया द्वारा भी वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र की अनिवार्यता संबंधी रेलवे के नियमों की प्रशंसा की गई थी।
भारतीय रेल ने वातानुकूलित श्रेणी में परिचय पत्र के अनिवार्यता की सफलता के बाद 01 नंवबर 2012 को जारी वाणिज्य परिपत्र सं0 68 द्वारा 01 दिसंबर 2012 के प्रभाव से रेलवे के किसी भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने के लिए भारतीय रेल से मान्यता प्राप्त 10 पहचान पत्रों में से किसी 01 पहचान पत्र का यात्रा के दौरान यात्री के पास होना अनिवार्य कर दिया गया है। यह पहचान यात्रा टिकट पर बुक किये गये यात्रियों में से किसी एक के पास अवश्य ही होनी चाहिए । हालांकि तत्काल योजना के तहत टिकट लेने वाले यात्रियों के पास वही पहचान पत्र होनी चाहिए जिसका उल्लेख टिकट खरीदते समय उनके द्वारा किया गया हो और जिसका नंबर टिकट पर अंकित हो । भारतीय रेल ने फिलहाल जिन 10 पहचान पत्रों को मान्यता प्रदान की है, वे इस प्रकार हैं:-
1. निर्वाचन आयोग भारत सरकार द्वारा जारी मतदाता पहचान-पत्र,
2. आयकर विभाग द्वारा निर्गत पैन कार्ड,
3. पासपोर्ट,
4. आर.टी.ओ. द्वारा निर्गत ड्राइविंग लाइसेंस,
5. भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा निर्गत सीरियल नंबर युक्त फोटो पहचान-पत्र,
6. मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज, जिसका वह छात्र है द्वारा निर्गत फोटो पहचानपत्र,
7. राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा निर्गत फोटो सहित पासबुक,
8. बैंकों द्वारा निर्गत फोटोयुक्त लेमिनेटेड क्रेडिट कार्ड
9. यूनिक पहचान पत्र ‘आधार’
10. केन्द्र/राज्य सरकार के पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, जिला प्रशासन, नगरपालिका संगठन और पंचायत प्रशासन द्वारा जारी फोटोयुक्त पहचान पत्र, जिसमें सीरियल नंबर हो ।
रेलवे ने यात्रियो को यात्रा के दौरान फोटो पहचान पत्र की अनिवार्यता बताने के लिए अपने स्तर पर प्रयास चालू कर दिया है। टिकट चेकिंग कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि इस प्रावधान को पूरी तरह से लागू करें। वस्तुतः यह प्रावधान जनहित में है और सभी को इसे लागू करने में सहयोग करना चाहिए। (PIB) 19-दिसंबर-2012 15:18 IST
*इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं।
मीणा/सुमन-299
पूरी सूची.19.12.2012
Friday, November 23, 2012
आरक्षित सवारी डिब्बों में यात्रा
पहचान के निर्धारित प्रमाण की संख्या नौ से बढ़कर दस
23-नवंबर-2012 20:05 IST
रेल राज्य मंत्री श्री कोटला जय सूर्य प्रकाश रेडडी ने आज राज्य सभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 01.12.2012 से किसी भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने के लिए टिकट दर्ज किसी एक यात्री को पहचान के निर्धारित प्रमाणों में से एक दिखाना होगा और ऐसा न होने पर यात्री को बिना टिकट समझा जाएगा और तदनुसार, प्रभार लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बहरहाल, इस प्रावधान से तत्काल योजना के मौजूदा प्रावधान पर असर नहीं पड़ेगा जहां यात्रा के दौरान यात्री टिकट पर दर्शाए पहचान के मूल प्रमाण को दिखाना आवश्यक होता है।
उन्होंने बताया पहचान के निर्धारित प्रमाणों की सूची में निम्नलिखित पहचान कार्ड को जोड़कर पहचान के निर्धारित प्रमाण की संख्या नौ से बढ़कर दस हो गई है:-
“राज्य/केंद्रीय सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, जिला प्रशासन, नगर निकायों और पहचान प्रशासन द्वारा जारी क्रमांक फोटो पहचान पत्र। “ (PIB)
वि.कासोटिया/संजीव/पवन-5501
23-नवंबर-2012 20:05 IST
रेल राज्य मंत्री श्री कोटला जय सूर्य प्रकाश रेडडी ने आज राज्य सभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 01.12.2012 से किसी भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने के लिए टिकट दर्ज किसी एक यात्री को पहचान के निर्धारित प्रमाणों में से एक दिखाना होगा और ऐसा न होने पर यात्री को बिना टिकट समझा जाएगा और तदनुसार, प्रभार लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बहरहाल, इस प्रावधान से तत्काल योजना के मौजूदा प्रावधान पर असर नहीं पड़ेगा जहां यात्रा के दौरान यात्री टिकट पर दर्शाए पहचान के मूल प्रमाण को दिखाना आवश्यक होता है।
उन्होंने बताया पहचान के निर्धारित प्रमाणों की सूची में निम्नलिखित पहचान कार्ड को जोड़कर पहचान के निर्धारित प्रमाण की संख्या नौ से बढ़कर दस हो गई है:-
“राज्य/केंद्रीय सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, जिला प्रशासन, नगर निकायों और पहचान प्रशासन द्वारा जारी क्रमांक फोटो पहचान पत्र। “ (PIB)
वि.कासोटिया/संजीव/पवन-5501
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